भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर खुलवाए जाते थे बैंक खाते, फिर उन्हीं खातों से देशभर में साइबर ठगी का खेल; हरिद्वार से गिरफ्तारी, पासबुक-चेकबुक-डेबिट कार्ड और कार बरामद
देहरादून । उत्तराखण्ड में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों के हवाले कर देता था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर धोखाधड़ी से आए लाखों रुपये के लेन-देन में किया जाता था। STF ने इस मामले में हरिद्वार से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर एक बड़े नेटवर्क की परतें उधेड़नी शुरू कर दी हैं।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सीधे साइबर ठगी नहीं करता था, बल्कि ठगों को “म्यूल अकाउंट” उपलब्ध कराता था। यानी ऐसे बैंक खाते, जो भोले-भाले लोगों को लालच, प्रलोभन या झांसे में लेकर उनके नाम पर खुलवाए जाते थे। इसके लिए आरोपियों द्वारा फर्जी फर्म तैयार की जाती थी, दस्तावेज बनाए जाते थे और फिर उन्हीं कागजातों के आधार पर बैंकों में कॉरपोरेट या करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, STF अजय सिंह ने बताया कि गोपनीय सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर साइबर पुलिस टीम को सक्रिय किया गया। जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से ऐसे खाते तैयार कर रहा था, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से वसूली गई रकम को इधर-उधर करने में होता था। इन खातों में अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों की धनराशि आने-जाने के प्रमाण मिले हैं। यही नहीं, आरोपियों के कब्जे से मिले कुछ खातों के संबंध में NCRP पोर्टल पर शिकायतें भी दर्ज पाई गईं।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF उत्तराखण्ड के निर्देशन और सहायक पुलिस अधीक्षक कुश मिश्रा, IPS के निकट पर्यवेक्षण में STF की साइबर पुलिस टीम ने हरिद्वार में छापा मारकर तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इस संबंध में साइबर थाना देहरादून पर मुकदमा अपराध संख्या 22/2026 के तहत धारा 111, 318(4), 61(2) BNS एवं 66D आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि पुत्र अशोक कुमार, राजन चौधरी पुत्र ओम प्रकाश चौधरी और विनित राणा पुत्र धीर सिंह के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि इनसे पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और इनके अन्य साथियों के बारे में भी सुराग जुटाए जा रहे हैं। STF अब बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल कर रही है, जिससे इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे बड़े चेहरों तक पहुंचा जा सके।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्विफ्ट कार, विभिन्न बैंकों की तीन पासबुक, तीन चेकबुक, पांच मोबाइल फोन, आईडीबीआई बैंक की एक बैंक बुक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक चेक, दस डेबिट कार्ड, पांच पैन कार्ड, तीन आधार कार्ड और अलग-अलग फर्मों की पांच मुहरें बरामद की हैं। बरामद सामग्री से साफ संकेत मिलते हैं कि गिरोह बैंकिंग दस्तावेजों के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर रहा था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की रीढ़ बनते जा रहे हैं। ठग सीधे सामने न आकर ऐसे खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि ठगी की रकम का ट्रैकिंग सिस्टम भटक जाए। लेकिन STF की यह कार्रवाई बताती है कि अब साइबर अपराधियों के नेटवर्क में छिपे “सप्लाई चैन” पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, STF अजय सिंह ने जनता से अपील की है कि अंजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल से सावधान रहें, किसी भी व्यक्ति या संस्था को अपने दस्तावेज और निजी जानकारी साझा न करें, “डिजिटल अरेस्ट” जैसी बातों पर भरोसा न करें, फर्जी निवेश योजनाओं और पैसा दोगुना करने वाले प्रलोभनों से दूर रहें तथा गूगल पर मिले कस्टमर केयर नंबरों पर बिना सत्यापन कॉल करने से बचें। उन्होंने कहा कि वित्तीय साइबर अपराध होने की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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