अधिकारियों को दी जनकल्याण की ठोस रूपरेखा बनाने की हिदायत
पहली विभागीय समीक्षा बैठक में बोले मंत्री—समाज कल्याण विभाग सीधे आमजन से जुड़ा, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
देहरादून। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने सोमवार को विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करते हुए स्पष्ट किया कि समाज कल्याण विभाग सरकार की जनोन्मुखी सोच का केंद्र है और इसकी योजनाएं सीधे समाज के हर वर्ग की प्रगति से जुड़ी हुई हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद आयोजित अपनी पहली विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग से संबंधित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख रूपरेखा तैयार की जाए, ताकि जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।
बैठक में मंत्री खजान दास ने कहा कि समाज कल्याण विभाग केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता तीनों को समान महत्व दिया जाए। उनका कहना था कि जब विभाग का दायरा आमजन के जीवन, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक उन्नयन से जुड़ा हो, तब कार्यप्रणाली भी उसी गंभीरता और प्रतिबद्धता के अनुरूप होनी चाहिए।
समाज कल्याण मंत्री ने विभागीय योजनाओं की सिलसिलेवार समीक्षा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत वर्ष 2047’ के विजन को धरातल पर उतारने और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सपनों के उत्तराखण्ड को आगे बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पर पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि उस वास्तविक बदलाव से आंकी जाएगी, जो समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में दिखाई दे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभाग की सभी योजनाओं की वर्तमान स्थिति, लाभार्थियों तक पहुंच, क्रियान्वयन की गति, लंबित प्रकरणों और भविष्य की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव, अनावश्यक देरी या प्रशासनिक जटिलता के पात्र लोगों तक पहुंचे। मंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में विभागीय कामकाज को और अधिक परिणामपरक और जवाबदेह बनाया जाएगा।

बैठक के दौरान खजान दास ने कहा कि समाज कल्याण से जुड़े विषय बहुआयामी हैं और इनमें विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में समाज कल्याण से जुड़े सभी विभागों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। माना जा रहा है कि इस संयुक्त बैठक में विभिन्न योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन, विभागीय तालमेल और राज्य स्तर पर एक व्यापक सामाजिक विकास रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
मंत्री के तेवरों से साफ संकेत मिले कि सरकार समाज कल्याण विभाग को केवल योजना संचालन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे जनविश्वास, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना चाहती है। उनकी समीक्षा बैठक को विभागीय सक्रियता के नए दौर की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। बैठक में अधिकारियों को यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि योजनाओं के संचालन में लापरवाही, ढिलाई या अपारदर्शिता के लिए अब बहुत कम गुंजाइश होगी।
इस अवसर पर अपर सचिव समाज कल्याण प्रकाश चन्द्र, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय योजनाओं की समीक्षा के साथ आगामी कार्ययोजना को लेकर भी प्रारंभिक चर्चा की गई।

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