देहरादून, । उत्तराखंड के वरिष्ठ समाजसेवी एवं विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित ब्रिगेडियर पी.एस. गुरंग का 28 मार्च की देर रात मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। 81 वर्ष की आयु में उनके अचानक चले जाने से गोरखाली समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरे समाज में शोक की लहर फैल गई है। उनके निधन को समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिगेडियर गुरंग का जीवन वीरता, समर्पण और सेवा की अद्भुत मिसाल रहा। उन्होंने न केवल सैन्य जीवन में उत्कृष्ट योगदान दिया, बल्कि पारिवारिक स्तर पर भी देशभक्ति की मिसाल कायम की। उनके पुत्र, शहीद लेफ्टिनेंट गौतम गुरंग (सेना मेडल), ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए थे। पिता और पुत्र दोनों ने 3/4 गोरखा रेजिमेंट में रहते हुए देश सेवा का गौरवशाली इतिहास रचा।
अपने इकलौते पुत्र की शहादत के बाद भी ब्रिगेडियर गुरंग ने खुद को समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘गौतम ट्रस्ट’ की स्थापना कर अपनी पूरी पेंशन और स्वयं की आय का बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों के कल्याण में लगा दिया। इस ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने अनेक गरीब बच्चों और युवाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए। साथ ही ‘गौतम बॉक्सिंग संस्था’ के जरिए युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर उन्हें नई दिशा देने का काम किया।
उनकी प्रेरणा से अनेक युवा सेना, पैरामिलिट्री और अन्य सरकारी सेवाओं में चयनित होकर देश सेवा कर रहे हैं। सामाजिक जीवन में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे उत्तराखंड सरकार में पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री स्तर) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। वर्ष 2005 से 2008 तक गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने समाज में एकता और विकास को नई दिशा दी।

गोरखाली संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्होंने गुरांश सांस्कृतिक कला केंद्र की स्थापना की, जो आज भी उनकी सोच और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। वे कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहकर संरक्षक और वरिष्ठ सलाहकार के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
टपकेश्वर मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया गया, जहां 3/4 गोरखा रेजिमेंट के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों, समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं नेहा जोशी ने भी उनके गढ़ी कैंट स्थित आवास पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
ब्रिगेडियर गुरंग अपने पीछे पत्नी वीरमाता पुष्पलता गुरंग, पुत्री मीनाक्षी गुरंग त्यागी, दामाद कर्नल रजत त्यागी तथा दो नातियों को छोड़ गए हैं। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा और प्रेरणा की ऐसी विरासत है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

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