एडीजी का सख्त रुख: महिला अपराध और नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस, नैनीताल-ऊधमसिंहनगर पुलिस को सख्त हिदायत

हल्द्वानी। उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय की ओर से अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को लेकर मंगलवार को हल्द्वानी में अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन ने जनपद नैनीताल और ऊधमसिंहनगर की कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं और पुलिस कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में दोनों जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, समस्त राजपत्रित अधिकारियों तथा क्षेत्राधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान एडीजी डॉ. मुरुगेशन ने दोनों जनपदों के क्षेत्राधिकारियों के कार्यों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए विशेष अपराधों की स्थिति, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी, लंबित विवेचनाओं के निस्तारण तथा थानों और पुलिस कार्यालयों की कार्यप्रणाली का गहन आकलन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

समीक्षा बैठक में महिला संबंधी अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। एडीजी ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों की विवेचना निर्धारित 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता और गुणवत्ता—तीनों का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और विवेचनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

नशा तस्करी और एनडीपीएस अधिनियम के मामलों पर भी एडीजी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई केवल छोटे तस्करों तक सीमित न रहे, बल्कि नशे के बड़े नेटवर्क को चिन्हित कर उसे ध्वस्त करने की दिशा में प्रभावी अभियान चलाया जाए। उन्होंने बड़े तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई करने तथा उनकी अवैध संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। इससे स्पष्ट संकेत दिया गया कि राज्य पुलिस अब नशे के खिलाफ केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर आर्थिक और संगठित नेटवर्क पर भी प्रहार करेगी।

बैठक में गुमशुदगी के मामलों, विशेषकर नाबालिगों की बरामदगी को भी अत्यंत गंभीर विषय माना गया। एडीजी ने दोनों जनपदों की पुलिस को निर्देश दिए कि गुमशुदा व्यक्तियों की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में तत्काल खोजबीन, प्रभावी समन्वय और तकनीकी सहायता का उपयोग किया जाए, ताकि हर गुमशुदा व्यक्ति तक शीघ्र पहुंचा जा सके।

अज्ञात शवों की शिनाख्त को लेकर भी एडीजी ने आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग, तकनीकी संसाधनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी इस्तेमाल कर अज्ञात शवों की पहचान की प्रक्रिया को तेज और अधिक परिणामकारी बनाया जाए। इससे न केवल पहचान में आसानी होगी, बल्कि संबंधित परिवारों को भी राहत मिल सकेगी।

इसके साथ ही एडीजी ने थानों और पुलिस कार्यालयों में आने वाली शिकायतों तथा प्रार्थना पत्रों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यशैली में जवाबदेही और पारदर्शिता दिखाई देनी चाहिए। थानों और कार्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए, लंबित मालों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जाए।

डॉ. मुरुगेशन ने डिजिटल पुलिसिंग पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने ई-साक्ष्य सहित विभिन्न डिजिटल पोर्टलों पर लंबित डेटा फीडिंग की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिस व्यवस्था में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए पुलिस बल को नवीनतम तकनीकों और नवाचारों का उपयोग करते हुए कार्यकुशलता बढ़ानी होगी।

बैठक में एडीजी ने साफ शब्दों में कहा कि अपराध नियंत्रण, विवेचना, शिकायत निस्तारण और कानून व्यवस्था से जुड़े कार्यों में यदि कहीं शिथिलता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाएं और जनता के प्रति संवेदनशील तथा जवाबदेह पुलिसिंग सुनिश्चित करें।

समीक्षा बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी., वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर अजय गणपति सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा दोनों जनपदों के क्षेत्राधिकारी उपस्थित रहे। बैठक को आगामी समय में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, नशा तस्करी पर अंकुश और गुमशुदगी के मामलों के प्रभावी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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