माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं देवी हैं। इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। ये शत्रु-नाश, वाक्-स्तंभन, बुद्धि-विनाश और विपत्तियों से रक्षा करने वाली शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड में प्रलयंकारी तूफान आया था, तब माँ बगलामुखी ने उसे रोककर सृष्टि की रक्षा की थी। इस दिन शत्रुओं पर विजय, कोर्ट-कचहरी में सफलता, नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति और सिद्धि प्राप्ति के लिए विशेष पूजा की जाती है।
बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है।
- तारीख: 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार (उदया तिथि के अनुसार मुख्य रूप से इसी दिन मनाई जाएगी)।
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 8:49 बजे (कुछ पंचांगों में थोड़ा अंतर हो सकता है)।
- अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 7:21 बजे।
पूजा का शुभ समय:
- प्रातः काल से दोपहर तक (सूर्योदय के बाद जितनी जल्दी संभव हो)।
- कई साधकों के अनुसार महाविद्या पूजा में रात्रि काल (विशेषकर निशिता मुहूर्त) अधिक प्रभावशाली होता है।
- दिल्ली/उत्तर भारत के लिए चौघड़िया मुहूर्त स्थानीय पंचांग से जाँच लें।
नोट: सटीक मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से पुष्टि करें, क्योंकि थोड़ा अंतर हो सकता है।
बगलामुखी जयंती का महत्व
इस महापर्व पर माँ बगलामुखी की उपासना करने से:
- शत्रु, मुकदमे, प्रतिस्पर्धा और नकारात्मक शक्तियों पर विजय मिलती है।
- वाणी पर नियंत्रण, बुद्धि की तीक्ष्णता और मन की स्थिरता प्राप्त होती है।
- राजनीति, कानून, मीडिया या किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
- काले जादू, बुरी नजर और अचानक विपत्तियों से रक्षा होती है।
यह दिन ब्रह्मास्त्र विद्या के रूप में भी जाना जाता है।
विशेष पूजन विधि (सरल और प्रभावशाली)
- स्नान और तैयारी: प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें। पीले वस्त्र (पीताम्बर) धारण करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- पूजा स्थल: पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। पीला वस्त्र बिछाकर माँ बगलामुखी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- सामग्री: पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, पीला चंदन, केसर, मिठाई (खीर या हलवा), अगरबत्ती, दीपक (पीला या घी का), फल और पीला कपड़ा।
- पूजा के मुख्य चरण:
- गणेश पूजन और कलश स्थापना से शुरू करें।
- माँ को हल्दी का तिलक लगाएँ, पीले फूल चढ़ाएँ।
- धूप-दीप जलाएँ और आरती करें।
- मंत्र जप: मुख्य मंत्र का जाप करें (नीचे दिया गया है)। हल्दी की माला से जप विशेष फलदायी है।
- हवन: संभव हो तो चने की दाल और हल्दी से हवन करें।
- आरती और स्तोत्र: बगलामुखी स्तोत्र का पाठ करें।
- विशेष: पूजा अकेले या सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन में करें। चने की दाल से यंत्र बनाकर पूजा की जा सकती है।
मुख्य बगलामुखी मंत्र:
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।
इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार या 1008 बार करें। जप के दौरान पीली माला का उपयोग करें।
कथा का सारांश
पौराणिक मान्यता है कि देवताओं ने जब राक्षसों के अत्याचार से परेशान होकर माँ बगलामुखी का आह्वान किया, तो उन्होंने अपने पीले रूप से शत्रुओं की जीभ और वाणी को स्तंभित कर दिया। इसीलिए वे स्तंभन शक्ति की देवी कही जाती हैं।
उपाय: इस दिन व्रत रखें, मंत्र जप करें और पीले रंग की वस्तुएँ दान करें। मंदिर में विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाना और भी शुभ होता है (जैसे पीताम्बरा पीठ, दतिया या अन्य बगलामुखी मंदिर)।
सावधानी: तांत्रिक साधना होने के कारण पूजा में शुद्धता और गुरु-मार्गदर्शन आवश्यक है।
जय माँ बगलामुखी! इस पावन अवसर पर माँ की कृपा से सभी भक्तों को शत्रु-नाश और विजय प्राप्त हो। 🙏
(सभी तिथि-समय दिल्ली/उत्तर भारत के अनुमानित हैं। स्थानीय पंचांग से सत्यापित करें।)
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