उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन का नया अध्याय: सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक का सफल परीक्षण और आगामी मानसून हेतु ‘ऑरेंज अलर्ट’ की मुस्तैदी

देहरादून।उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए यह सप्ताह तकनीक और सतर्कता के संगम का गवाह बना। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप, शनिवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सी-डॉट द्वारा ‘सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम’ का सफल परीक्षण किया गया। प्रातः 11:46 बजे प्रसारित इस अलर्ट संदेश ने राज्य में एक ऐसी आधुनिक चेतावनी प्रणाली की आधिकारिक शुरुआत कर दी है, जो आने वाले मानसून और चारधाम यात्रा के दौरान ‘वरदान’ सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिन्होंने इस तकनीक को राज्य में जल्द लागू कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से पैरवी की थी, ने इसे उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘लोकेशन-स्पेसिफिक’ कार्यप्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ लक्षित चेतावनी भेजी जा सकेगी, जिससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी और अंतिम व्यक्ति तक समय पर सूचना पहुँच सकेगी।

एक ओर जहाँ तकनीक के क्षेत्र में राज्य को यह बड़ी सौगात मिली है, वहीं दूसरी ओर वर्तमान मौसम की चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से ‘हाई अलर्ट’ पर है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने रविवार को आए आंधी-तूफान के बाद सभी जनपदों के साथ समीक्षा बैठक की। मौसम विभाग ने सोमवार, 4 मई और मंगलवार, 5 मई के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। 4 मई को देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल सहित मैदानी व मध्य हिमालयी क्षेत्रों में, तथा 5 मई को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे उच्च हिमालयी जनपदों में आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र सक्रिय रहें और मौसम की हर सूचना तत्काल आमजन तक पहुँचाई जाए। विशेष रूप से चारधाम यात्रा के सुचारु संचालन हेतु हेलीकॉप्टर सेवाओं को केवल मौसम साफ होने पर ही संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने इस पूरी व्यवस्था को ‘गेम-चेंजर’ बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और त्वरित प्रशासनिक प्रतिक्रिया के समन्वय से जनहानि को न्यूनतम करना अब संभव हो सकेगा। शासन ने आम नागरिकों और तीर्थयात्रियों से भी अपील की है कि वे मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें और प्रतिकूल परिस्थितियों में अनावश्यक यात्रा से बचें, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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