यमुना घाटी में गूँजी राज्य आंदोलनकारियों की हुंकार; धीरेंद्र प्रताप “उत्तराखंडी जंग बंधु” सम्मान से विभूषित

‘दो रोटी खाएंगे, आंदोलनकारी को सम्मान दिलाएंगे’ के नारे के साथ देहरादून कूच का आह्वान; सरकार की उपेक्षा पर छलके वरिष्ठ नेता के आंसू

बड़कोट (यमुना घाटी)। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के शीर्ष नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप को यमुना घाटी के आंदोलनकारियों द्वारा “उत्तराखंडी जंग बंधु” सम्मान से सम्मानित किया गया है। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति (यमुना घाटी) के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष पृथ्वीराज कपूर की अध्यक्षता में संपन्न हुए एकदिवसीय सम्मेलन में धीरेंद्र प्रताप के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित उपाधि से नवाजा गया।

ढोल-दमाऊ और नरसिंघे के साथ जोरदार स्वागत

इससे पूर्व, बड़कोट आगमन पर पुरोला, नौगांव, उत्तरकाशी, बड़कोट और चिन्यालीसौड़ समेत गंगा व यमुना घाटी के चारों तरफ से आए सैकड़ों आंदोलनकारियों ने धीरेंद्र प्रताप का ढोल-दमाऊ, नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्र नरसिंघे के साथ ऐतिहासिक स्वागत किया। बड़कोट की सड़कों पर एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिससे पूरा आसमान “उत्तराखंडी जंग बंधु धीरेंद्र प्रताप जिंदाबाद” के नारों से गुंजायमान हो उठा।

10 फीसदी आरक्षण पर बोलते हुए छलके आंसू

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता धीरेंद्र प्रताप भाजपा सरकार में आंदोलनकारियों की उपेक्षा, अपमान और दुर्दशा का जिक्र करते हुए भावुक हो गए और मंच पर ही रो पड़े। उनका गला भर आया और उन्होंने कहा:

“साल 2016 में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट (आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण) के लिए हमने लंबा संघर्ष किया था। तब जाकर कांग्रेस सरकार ने गैरसैण विधानसभा में इसे पास कराया था। लेकिन बेहद दुखद है कि आज 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी भाजपा सरकार आंदोलनकारियों को इस आरक्षण का लाभ देने को तैयार नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि तीन महीने पहले उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी और उन्होंने एक बड़ा जन प्रदर्शन कर सचिवालय का घेराव किया था। तब गृह सचिव शैलेश बगौली व अन्य छह आला अधिकारियों ने 3 घंटे लंबी बैठक कर आश्वासन दिया था कि 15 दिनों के भीतर कैबिनेट बैठक बुलाकर 10 फीसदी आरक्षण को सुरक्षित किया जाएगा और पुलिस व अन्य विभागों में चयनित युवाओं को नियुक्तियां दी जाएंगी। लेकिन आज भी बुजुर्ग आंदोलनकारियों की आंखों में सिर्फ आंसू हैं, सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।

“समय दान” और “दो रोटी” का फॉर्मूला

धीरेंद्र प्रताप ने मंच से राज्य आंदोलनकारियों से एक बड़ा संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह आंदोलनकारियों से “समय दान” मांगने आए हैं। यदि वे देहरादून में गांधीवादी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने के लिए तैयार हैं, तो वे एक महीने के भीतर देहरादून में महासंग्राम करेंगे। धीरेंद्र प्रताप ने नया नारा देते हुए कहा:
“दो रोटी खाएंगे, आंदोलनकारी को सम्मान दिलाएंगे, आंदोलनकारी के सपने का उत्तराखंड बनाएंगे।” उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अपने साथ घर से दो रोटी बांधकर आएं, हक की लड़ाई मिलकर लड़ी जाएगी।

सरकारी तंत्र और राज्य मंत्री की लाचारी आई सामने

सम्मेलन में नवविवाहित राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती चारु कोठारी (चारु तिवारी) भी मौजूद थीं, लेकिन आंदोलनकारियों के आक्रोश के आगे सरकारी तंत्र की लाचारी साफ दिखी। उन्होंने कहा कि सभी मांगें पूरी नहीं की जा सकतीं, फिर भी वे मुख्यमंत्री के सामने इन बातों को रखेंगी। उन्होंने आगामी दिसंबर में चुनाव की संभावना जताते हुए कहा कि 5-6 महीने बचे हैं और जल्द ही आचार संहिता लग जाएगी, जिससे सरकार के लिए तुरंत कार्रवाई करना कठिन होगा।

सरकार पर बरसे पूर्व पालिका अध्यक्ष और केंद्रीय पदाधिकारी

राज्य आंदोलन के दौरान टाडा (TADA) के तहत गिरफ्तार हुए बड़कोट नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अतुल रावत ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हमने इस राज्य के गठन के लिए अपना खून बहाया, और आज हमारे बच्चे बेरोजगारी से त्रस्त होकर सड़कों पर आंसू बहा रहे हैं। आंदोलनकारी इस सरकार की प्राथमिकताओं में कहीं नहीं हैं।”
वहीं, चिन्हित आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हरिकृष्ण भट्ट, महिला शाखा की अध्यक्ष सावित्री नेगी, केंद्रीय संरक्षक श्रीमती कमला पांडे, राजपाल और विष्णु डिमरी ने भी सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

शहीदों और पुरोधाओं को किया याद

सम्मेलन में समिति के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय जे.पी. पांडे के योगदान को याद किया गया। इसके साथ ही राज्य आंदोलन के अमर शहीदों— हंसा धनाई, बेलमती चौहान, धनपत सिंह, राजेश रावत तथा आंदोलन के पुरोधा इंद्रमणि बडोनी और बाबा उत्तराखंडी की स्मृति में जोरदार नारेबाजी कर उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित नेता:
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल, केंद्रीय प्रवक्ता महेश जोशी, गाजियाबाद कांग्रेस के महासचिव हरेंद्र सिंह बाबा, समिति के महासचिव गणेश रमौला और मनीष डिमरी समेत सैकड़ों आंदोलनकारी उपस्थित रहे।

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