
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद में दायित्वधारियों की फौज बढाए जाने की आलोचना की है ।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि पिछले कुछ महीने में जो दायित्वधारी इसमें बनाए गए थे वह कुछ भी कार्य करने में सफल नहीं हुए हैं। अब उसके बाद एक नए अध्यक्ष की नियुक्ति महज आंदोलनकारियों को बहलाने के लिए की गई लगती है । इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
वीरेंद्र प्रताप ने कहा एक और चुनाव सामने हैं और चुनाव आचार संहिता के जल्द ही लागू होने के आसार हैं । ऐसी स्थिति में आंदोलनकारियों का चिन्हिकरण ,आंदोलनकारियों को 10 पीसदी आरक्षण की सुविधा मिल जाना आंदोलनकारियों के आश्रितों के लिए कोई लाभकारी कदम उठाया जाना एक झूठ से ज्यादा कुछ दिखाई नहीं देता।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि बेहतर होता कि जो पहले से दायित्व धारी थे वह कुछ करके दिखाते लेकिन उनकी अक्षमता के कारण कोई भी काम किनारे नहीं लग सका । उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चिन्हिकरण के लिए मात्र दो महीने की समय सीमा बढ़ाई जाने को भी ढकोसला बताया और जो लोग सरकारी नौकरियों में स्थान पा गए हैं उनको नौकरियां ज्वाइन करने में सरकार द्वारा की जा रही देरी की भी कड़ी आलोचना की ।
उन्होंने कहा सरकार ने आंदोलनकारियों को भिखारी बना दिया है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने सम्मान परिषद के नए अध्यक्ष बनाए गए हुकुम सिंह कुवर को अपनी शुभकामनाएं दी परंतु कहा उनके सामने भी कठिन टास्क है उन्हें रन भी मानने हैं और ओवर भी कम है,ऐसे मे वे कुछ कर पाएंगे उन्हें विश्वास नही होता।।

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