
देहरादून । उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रदेशवासियों को नकली एवं कूटरचित दवाओं के बढ़ते कारोबार के प्रति आगाह करते हुए एक विस्तृत जन-जागरूकता अपील जारी की है। एसएसपी एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन माध्यमों, अनधिकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं और अवैध विक्रेताओं के जरिए नकली दवाओं की बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जो न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए घातक हैं बल्कि उनकी जान के लिए भी गंभीर खतरा बन रही हैं।
QR कोड से करें दवा की पहचान
एसटीएफ ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे दवा खरीदते समय हमेशा अधिकृत और लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर का ही रुख करें तथा खरीद का बिल अनिवार्य रूप से प्राप्त करें। बिल में दवा का नाम, बैच नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज होने चाहिए। दवा की स्ट्रिप या पैकेजिंग पर अंकित QR कोड अथवा बारकोड को मोबाइल से स्कैन कर उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें। स्कैन करने पर दवा का नाम, निर्माता कंपनी और बैच नंबर जैसी जानकारियां स्क्रीन पर प्रदर्शित होती हैं।
केंद्र सरकार ने जीवन रक्षक 200 प्रमुख दवाओं की प्रत्येक स्ट्रिप के लिए यूनिक कोड की व्यवस्था की है। इस कोड को स्कैन करने पर संबंधित दवा कंपनी के सर्वर में भी ग्राहक द्वारा दवा जांचने का रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है, जिससे नकली दवाओं की पहचान और आसान हो जाती है। इसके अतिरिक्त दवा के पैकेट पर लिखी जानकारी को ध्यान से पढ़ें — वर्तनी की गलतियां, ओवर-प्रिंटिंग या किसी भी प्रकार की विसंगति नकली दवा का संकेत हो सकती है। बिल पर अंकित बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और एमआरपी का मिलान पैकेट पर दर्ज विवरण से करना भी जरूरी है।
सस्ती दवा का लालच पड़ सकता है भारी
एसटीएफ ने विशेष रूप से चेताया है कि यदि कोई विक्रेता दवा पर असामान्य या अत्यधिक छूट का प्रलोभन दे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। नकली दवाओं की बिक्री के लिए अक्सर भारी डिस्काउंट का झांसा दिया जाता है। थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम में डालना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर ऑनलाइन दवा बेचने वाले पेजों पर भी भरोसा न करें। ऐसे विक्रेता प्रायः बिना लाइसेंस के अथवा फर्जी लाइसेंस के आधार पर संचालित होते हैं और किसी फर्जी खाते में भुगतान लेकर नकली दवा कूरियर से भेज देते हैं। ऑनलाइन दवा की खरीद-बिक्री केवल अधिकृत एवं पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही करें।
दवा विक्रेता भी रहें सावधान
एसटीएफ ने दवा विक्रेताओं से भी अपील की है कि वे दवाओं की खरीद केवल लाइसेंसधारी और अधिकृत होलसेल विक्रेताओं से ही करें। मेडिकल स्टोर पर आकर या फोन पर अत्यंत कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव देने वाले व्यक्तियों से विशेष सतर्कता बरती जाए। खरीद के समय बिल, जीएसटी विवरण, बैच नंबर और आपूर्ति स्रोत का पूर्ण सत्यापन अनिवार्य है। नकली दवा आपूर्ति करने वाले गिरोह फर्जी बिल और कूटरचित दस्तावेजों का भी उपयोग करते हैं, इसलिए प्रत्येक कागजात की सावधानीपूर्वक जांच करना जरूरी है।
कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
एसएसपी एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि नकली, कूटरचित अथवा भ्रामक दवाओं के निर्माण, विक्रय, वितरण, परिवहन या खरीद-फरोख्त में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 336 और 338, कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 व 65 तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कठोर दंड का प्रावधान है। यह अपराध सीधे जनस्वास्थ्य और मानव जीवन से जुड़ा है, इसलिए इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।
सूचना दें, जीवन बचाएं
एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि यदि नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण, परिवहन, विक्रय अथवा ऑनलाइन आपूर्ति की कोई भी सूचना मिले तो उसे तत्काल निकटतम पुलिस थाने, एसटीएफ उत्तराखंड अथवा औषधि विभाग को दें। एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि नागरिकों की सतर्कता और सक्रिय भागीदारी से ही इस प्रकार के संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
“थोड़े से लालच अथवा सस्ते दाम के चक्कर में अपने स्वास्थ्य एवं जीवन को जोखिम में न डालें — सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।” — एसएसपी एसटीएफ, उत्तराखंड

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