
देहरादून, 8 जून। उत्तराखण्ड एसटीएफ ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर कड़ा प्रहार किया है। दो दिनों की ताबड़तोड़ कार्रवाई में चार मुकदमे दर्ज कर कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है। अब तक एक माह के भीतर इस मामले में 6 मुकदमे दर्ज करते हुए 10 नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की जा चुकी है।
एसटीएफ के अनुसार, यह गिरोह देशभर में हो रहे साइबर फ्रॉड से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन में शामिल था। जांच में सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे या उनके खातों की बैंकिंग सुविधाएं हासिल कर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई जाती थीं। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, शेयर मार्केट और ऑनलाइन ट्रेडिंग धोखाधड़ी समेत कई अपराधों में ठगी गई रकम को ठिकाने लगाने (लेयरिंग) के लिए किया जा रहा था।
एसटीएफ और साइबर क्राइम टीम ने NCRP पोर्टल, समन्वय पोर्टल, I4C इनपुट, बैंकिंग रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज और मनी ट्रेल एनालिसिस के आधार पर इस संगठित नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से इन खातों के संबंध पाए गए हैं।
ताजा कार्रवाई में 8 जून को साइबर क्राइम थाना देहरादून और कुमाऊं में तीन एफआईआर दर्ज कर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया है। साथ ही इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों, बैंक खातों और संभावित बैंक कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर संदिग्ध खातों की पुनः जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी का अभियान लगातार जारी है। एसएसपी एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम या इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएं किसी अन्य को उपलब्ध कराता है, उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि किसी भी लालच या कमीशन के चक्कर में अपने बैंक खाते या संबंधित दस्तावेज किसी को न दें। ऐसे मामलों में खाताधारक भी उतना ही दोषी माना जाता है जितना मुख्य अपराधी।

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