
गंभीर रूप से घायल छात्रा मामले में बाल आयोग सख्त,अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
देहरादून। दून डिफेंस ड्रीमर्स से संबद्ध छात्रावास में अध्ययनरत एक छात्रा के गंभीर रूप से घायल होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। छात्रा के अभिभावकों ने उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत आख्या और आवश्यक अभिलेख तलब करने का निर्णय लिया है।
गुरुवार को छात्रा के पिता राहुल भगौरे एवं माता श्रीमती भगौरे, निवासी आगरा (उत्तर प्रदेश), उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना से मिले और अपनी पुत्री के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए विस्तृत शिकायत सौंपी। अभिभावकों ने बताया कि उनकी पुत्री दून डिफेंस ड्रीमर्स से संबद्ध छात्रावास की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद संस्थान अथवा छात्रावास प्रबंधन द्वारा उन्हें तत्काल कोई सूचना नहीं दी गई। उन्हें इस घटना की जानकारी किसी अन्य छात्रा के फोन के माध्यम से मिली।
शिकायत के अनुसार छात्रा को गंभीर अवस्था में पहले दून अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे मैक्स अस्पताल रेफर किया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। अभिभावकों का आरोप है कि घटना के समय छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। रात्रि के समय परिसर के बाहर कोई सुरक्षा कर्मी अथवा चौकीदार मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रा को अस्पताल पहुंचाने में संस्थान प्रबंधन की अपेक्षा स्थानीय लोगों और एक रसोइए की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
परिजनों ने आयोग को बताया कि घटना की सूचना समय पर न तो उन्हें दी गई और न ही पुलिस एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया। उन्होंने वर्तमान जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक सभी तथ्यों को समुचित रूप से सामने नहीं लाया गया है। ऐसे में मामले की वास्तविकता उजागर करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले पर उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील प्रकरण है क्योंकि एक बालिका का जीवन संकट में है। उन्होंने कहा कि किसी भी आवासीय छात्रावास या शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आयोग आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति करेगा।
डॉ. खन्ना ने कहा कि पूर्व में भी उक्त कोचिंग संस्थान से संबंधित विभिन्न शिकायतें आयोग के संज्ञान में आती रही हैं। इसके अलावा आयोग को समय-समय पर विभिन्न कोचिंग संस्थानों एवं उनसे संबद्ध छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य, आवासीय सुविधाओं तथा बाल अधिकारों के संरक्षण से जुड़े मामलों की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों में बाल संरक्षण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देहरादून देशभर में अपनी शैक्षणिक पहचान के लिए जाना जाता है, लेकिन तेजी से बढ़ रहे कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों के बीच बच्चों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आयोग इस प्रकरण को केवल एक व्यक्तिगत घटना के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देख रहा है।
आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट और अभिलेख तलब करने का निर्णय लिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। इस मामले पर अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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