
देहरादून/नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सीकर के छात्र उमेश और देहरादून की छात्रा रिया की दुखद मृत्यु पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट के जरिए बताया कि दोनों छात्रों ने Re-NEET के अत्यधिक दबाव के कारण अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। उन्होंने कहा कि 22 और 23 साल के ये बच्चे, जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था, वे इस ‘अन्यायी व्यवस्था’ से हार गए।
राहुल गांधी ने इस दुखद घटना के लिए केंद्र की मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की रक्षा करने के बजाय सरकार ने बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन और भविष्य के सौदागरों को संरक्षण दिया है। उन्होंने घोषणा की कि कोटा से एक ऐसी लड़ाई शुरू की जा रही है जिसका एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे के सपने इस तरह न टूटें और किसी माता-पिता को अपना बच्चा न खोना पड़े। उन्होंने हैशटैग #ChhatronKiGoonj के साथ कहा कि हर परिवार की यह पीड़ा अब पूरे देश में गूंजेगी।

उत्तराखंड कांग्रेस ने किया राहुल गांधी के हस्तक्षेप का स्वागत
इधर, उत्तराखंड कांग्रेस ने राहुल गांधी के इस संवेदनशील हस्तक्षेप का पुरजोर स्वागत किया है। कांग्रेस का कहना है कि रिया की आत्महत्या केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक दबाव और असुरक्षा का प्रतीक है जिससे आज देश के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण गुजर रहे हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस ने मांग की है कि परीक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को अवसर देना होना चाहिए, न कि उन्हें हताशा और निराशा के दलदल में धकेलना। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि छात्रों के हितों की रक्षा, परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर तत्काल ठोस और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी अपूर्णीय क्षति न झेलनी पड़े।

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