
रघुनाथ सिंह नेगी बोले – 35 साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को नहीं मिलती पेंशन, फिर विधायकों को क्यों मिल रहीं इतनी सुविधाएं
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा ने प्रदेश सरकार पर विधायकों के वेतन-भत्तों और पेंशन को लेकर तीखा हमला बोला है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि यह दुनिया का अनोखा मामला है जहां एक विधायक को महज 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि रिटायरमेंट या कार्यकाल पूरा होने पर उसे 60 हजार रुपये पेंशन का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि वेतन कम और पेंशन ज्यादा वाला यही फार्मूला सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू होना चाहिए था।
नेगी ने विधायकों को मिलने वाली सुविधाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि 50 हजार वेतन के अलावा उन्हें 1.5 लाख रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, जन सेवा कार्य के लिए 1.35 लाख रुपये, डीजल-पेट्रोल खर्च के 30 हजार रुपये और स्टाफ आदि के लिए 57 हजार रुपये अलग से मिलते हैं। वहीं पूर्व विधायकों को पहले साल 60 हजार रुपये मासिक पेंशन के साथ हर पूर्ण वर्ष पर 3 हजार रुपये अतिरिक्त और आयु स्लैब के हिसाब से भी अतिरिक्त पेंशन दी जाती है। इसके अलावा 26 हजार रुपये प्रतिमाह डीजल-पेट्रोल खर्च और वर्तमान-पूर्व विधायकों सहित उनके परिवार के लिए आजीवन स्वास्थ्य सुविधा का ठेका भी सरकार ने ले रखा है।

मोर्चा अध्यक्ष ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रदेश की आर्थिक हालत दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी है, वहां इन “बे-गैरत व गैर-जिम्मेदार” विधायकों को इतनी सुविधाएं किस आधार पर दी जा रही हैं। उन्होंने पूछा कि क्या ये विधायक सरकारी सेवक हैं, क्या ये पैरामिलिट्री जवानों से ज्यादा मेहनत करते हैं, और क्या 30-35 साल नौकरी में गुजारने वाले कर्मचारियों से भी ज्यादा काबिल हैं। नेगी ने कहा कि जनता को आखिर ये विधायक दे ही क्या रहे हैं।
उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि लंबी सरकारी सेवा के बावजूद कर्मचारियों को पेंशन की सुविधा से वंचित रखा गया है, फिर विधायकों को यह सुविधा क्यों दी जा रही है। मोर्चा ने सरकार पर तंज कसते हुए इन्हें “गैर-लाइसेंसी ठेकेदार” तक करार दिया और मांग की कि विधायकों पर लागू वेतन-पेंशन का यही कम वेतन-ज्यादा पेंशन वाला फार्मूला कर्मचारियों के लिए भी लागू किया जाए। पत्रकार वार्ता में दिलबाग सिंह और ठाकुर भाग सिंह भी मौजूद रहे।


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