

‘एक पौधा पुरानी पेंशन बहाली के नाम’ अभियान के तहत राजधानी में हुआ वृक्षारोपण, कर्मचारियों ने संघर्ष तेज करने का लिया संकल्प
देहरादून। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा, उत्तराखंड द्वारा रविवार को राजधानी देहरादून में “एक पौधा पुरानी पेंशन बहाली के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ पुरानी पेंशन बहाली की मांग को और अधिक मजबूती प्रदान करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं संगठन के पदाधिकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए पुरानी पेंशन बहाली तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने कहा कि जिस प्रकार एक पौधा भविष्य की पीढ़ियों को जीवन और सुरक्षा प्रदान करता है, उसी प्रकार पुरानी पेंशन कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी न्यायोचित मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वर्ष 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई, तो कर्मचारी वर्ग लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को करारा जवाब देगा। कर्मचारी और उनके परिवार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जनजागरण अभियान चलाकर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को जनता तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्णय चाहते हैं।

प्रदेश महासचिव सीता राम पोखरियाल ने कहा कि पुरानी पेंशन कोई राजनीतिक सौगात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक, नैतिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन को और अधिक व्यापक करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कर्मचारी अपनी एकजुटता और लोकतांत्रिक शक्ति के बल पर पुरानी पेंशन बहाल कराकर रहेंगे।
देहरादून जिलाध्यक्ष अवधेश सेमवाल ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के धैर्य और संयम को उनकी कमजोरी न समझे। कर्मचारी समाज का जागरूक वर्ग है और अपनी उपेक्षा का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देना भी जानता है। यदि 2027 से पहले पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो प्रदेशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर प्रत्येक कर्मचारी एवं उसके परिवार तक सरकार का रुख पहुंचाया जाएगा।
जनपद मंत्री अभिषेक नवानी ने कहा कि अब समय निर्णायक संघर्ष का है। कर्मचारी लगातार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन देकर समय व्यतीत कर रही है। उन्होंने कहा कि संगठन गांव, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर तक अभियान चलाकर कर्मचारियों को संगठित करेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि पुरानी पेंशन बहाली तक संगठन का संघर्ष किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कर्मचारियों ने पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और कहा कि जिस प्रकार पौधों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार पुरानी पेंशन कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के भविष्य की सुरक्षा का मजबूत आधार है। सभी कर्मचारियों से संगठन के साथ एकजुट होकर आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि “जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं होगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।” साथ ही सरकार से मांग की गई कि कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पूर्व पुरानी पेंशन बहाली पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए, अन्यथा कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से अपना जवाब देने के लिए तैयार हैं।
कार्यक्रम में संगठन के प्रदेश सचिव माखन लाल शाह, प्रदेश प्रभारी विक्रम रावत, उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता अश्वनी गुप्ता, उपाध्यक्ष अनूप कुमार, अभिलाष यादव, कैलाश चंद्र पांडे, देवेंद्र सिंह, प्रेम सिंह रावत, पूर्व सैनिक दरबान सिंह बोरा, सुरेश पुंडीर, जनार्दन सिलोड़ी, विनोद पाल, भगवान दास, अजय पाल, प्रवीण पाल, गुलाब सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक साथी, पूर्व सैनिक, किसान एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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