

देहरादून । छठे लोक संवर्धन पर्व के चौथे दिन देहरादून का परेड ग्राउंड उत्तराखंड की समृद्ध संगीत परंपराओं के जीवंत उत्सव में बदल गया। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में सैकड़ों दर्शक पहुंचे और पारंपरिक हस्तशिल्प, क्षेत्रीय व्यंजनों के साथ संगीत का आनंद लिया।
दिनभर दर्शकों ने देशभर के कारीगरों के स्टॉलों पर हथकरघा वस्त्र, काष्ठ शिल्प, पीतल के उत्पाद, बांस की वस्तुएं, टेराकोटा, अजरख प्रिंट और पारंपरिक आभूषणों को देखा और खरीदारी की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत लोकप्रिय युवा लोक गायक रोहित चौहान की ऊर्जावान प्रस्तुति से हुई। गढ़वाली और कुमाऊंनी गीतों को लोकप्रिय बनाने वाले रोहित ने ‘नंदरे’, ‘धन सिंह की गाड़ी’ और ‘रुपसा रमौती’ गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

इसके बाद प्रसिद्ध लोक गायिका माया उपाध्याय ने अपनी सुरीली आवाज से समां बांधा। उन्होंने ‘क्रीम पौडरा’, ‘चहा को होटल’ और ‘आंख्यों में सुरम’ जैसे गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।
शाम का मुख्य आकर्षण उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक-फ्यूजन बैंड पांडवास की प्रस्तुति रही। पारंपरिक लोक संगीत और आधुनिक संगीत के संगम के लिए जाने वाले पांडवास ने ‘राधा’, ‘धुन्याल’ और ‘गणपति देवा’ जैसी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में उत्तराखंड की लोककथाओं और सांस्कृतिक पहचान की झलक मिली, जिस पर दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधि ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व कारीगरों को राष्ट्रीय मंच देने के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता का भी उत्सव है। आज की प्रस्तुतियों ने इस महोत्सव को शिल्प, संस्कृति और समुदाय का अनूठा संगम बना दिया।

लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई 2026 तक परेड ग्राउंड में सुबह 11:30 बजे से रात 9:00 बजे तक निःशुल्क खुला है। महोत्सव के अंतिम दिन 15 जुलाई को प्रसिद्ध पंजाबी गायक परमिश वर्मा की लाइव प्रस्तुति होगी, जिसके साथ इस पांच दिवसीय उत्सव का समापन होगा।

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