दिल्ली में भी गूंजा हरेला का संदेश: मधु भट्ट ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जोड़ी संस्कृति और पर्यावरण की अलख

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ किया पौधारोपण

संस्कृति साहित्य कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने दिल्ली में हरेला हरियाली महोत्सव के तहत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाया। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और स्कूली बच्चों के साथ पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

नई दिल्ली/ देहरादून । उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) श्रीमती मधु भट्ट ने इस वर्ष राजधानी दिल्ली में भी हरेला हरियाली महोत्सव का आयोजन कर अनूठी पहल की। कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व हरेला को प्रकृति संरक्षण और जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक संदेश दिया।

महोत्सव के दौरान “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर मधु भट्ट की माताजी भी उपस्थित रहीं। पौधारोपण के दौरान पर्यावरण संरक्षण को पारिवारिक संस्कारों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया गया।

इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहल और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

दिल्ली के नव भारतीय पब्लिक स्कूल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के साथ रुद्राक्ष, बेलपत्र, आंवला सहित अनेक फलदार एवं धार्मिक महत्व वाले पौधे लगाए गए। इस अवसर पर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व, पौधों की उपयोगिता और उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं से भी परिचित कराया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मधु भट्ट ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे आत्मीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे केवल पर्यावरण का आधार नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की भी नींव हैं। उनका कहना था कि हरेला के संदेश को उत्तराखंड की सीमाओं से बाहर निकालकर पूरे देश में जनआंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल होगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प ले। इसी उद्देश्य से हरेला महोत्सव को राजधानी दिल्ली में भी जनभागीदारी के साथ मनाया गया।

दिल्ली प्रवास के दौरान भी उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता देते हुए मधु भट्ट ने हरेला महोत्सव को व्यापक जनसहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि लोकसंस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को साथ लेकर चलने से सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

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