

देहरादून। अगर आप भी देहरादून में रहते हैं तो यह खबर आपके और आपके बच्चों के भविष्य से सीधे जुड़ी है! आने वाले 20 सालों में आपका शहर कैसा दिखेगा, इसका फैसला अब किसी बंद कमरे में नहीं बल्कि खुद जनता तय कर रही है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में इन दिनों गजब की हलचल देखने को मिल रही है। शहर के भावी विकास को लेकर चलाए जा रहे दूसरे चरण के जनसुनवाई अभियान में लोगों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि प्राधिकरण अधिकारियों के भी पसीने छूट गए।
हर कोई अपने मोहल्ले, कॉलोनी और सड़क की बदहाली को दूर करने के लिए बेताब दिखा। सुनवाई के दूसरे दिन ही एमडीडीए दफ्तर में 28 नई आपत्तियां और तीखे सुझाव दर्ज कराए गए हैं, जिसने एमडीडीए के आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। शहरवासियों ने दोटूक अंदाज़ में साफ कर दिया है कि अब वो आधे-अधूरी योजनाओं से काम नहीं चलाएंगे, उन्हें ऐसा मास्टरप्लान चाहिए जो दून की पुरानी खूबसूरती को लौटाने के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को पूरा करे।
सुनवाई के दौरान एमडीडीए कार्यालय का माहौल किसी महापंचायत जैसा नजर आया। क्या आम नागरिक, क्या व्यापारी, क्या सामाजिक संगठन और क्या कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन—हर कोई नक्शों और फाइलों के साथ अपने-अपने इलाकों का रिपोर्ट कार्ड लेकर दफ्तर पहुंचा था। लोग सिर्फ शिकायतें दर्ज कराने नहीं आए थे, बल्कि ट्रैफिक जाम, खस्ताहाल सड़कें, पार्किंग का संकट, बदहाल जल निकासी और घटते हरित क्षेत्रों को लेकर एमडीडीए अधिकारियों के सामने समाधान के कड़े प्रस्ताव भी रखे।
प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो इस बार का जनसंवाद सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि जनता की हर एक जायज मांग को इस नए रोडमैप का हिस्सा बनाया जाएगा। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पहले चरण के बाद शुरू किए गए इस दूसरे चरण में आम जनता की सहभागिता ही सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि नागरिकों द्वारा दी गई हर एक आपत्ति और सुझाव को गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में विशेषज्ञ समितियों और तकनीकी अधिकारियों की टीम इन सभी सुझावों की बारीकी से जांच करेगी। जो भी विचार व्यावहारिक, नियमानुकूल और शहर हित में होंगे, उन्हें तुरंत महायोजना के अंतिम ब्लूप्रिंट में शामिल किया जाएगा।
वहीं, एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने का दावा किया है। उनका कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त हर बिंदु को दर्ज किया जा रहा है और किसी भी नागरिक का सुझाव बिना जांचे खारिज नहीं होगा। एमडीडीए का दावा है कि जनभागीदारी से तैयार हो रही ‘देहरादून महायोजना-2041’ शहर को एक पर्यावरण-अनुकूल, संतुलित और आधुनिक रूप देने में मील का पत्थर साबित होगी।
अब देखना यह होगा कि दूनवासियों के इन कड़े और व्यावहारिक सुझावों के बाद एमडीडीए शहर की इस नई तस्वीर को कैसे हकीकत में बदलता है।

Recent Comments