

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के संरक्षक धीरेन्द्र प्रताप ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की संवेदनहीनता और नाकामी बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की कि चिन्हीकरण से वंचित सभी आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा देकर सम्मानित किया जाए।
कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी आश्रित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले दो माह से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। इससे आंदोलनकारियों में गहरा रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया था और उनका समाधान भी किया था।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं राज्य आंदोलनकारी रहे हैं और साहसिक निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनसे अपेक्षा है कि वे बड़ा निर्णय लेते हुए चिन्हीकरण से वंचित सभी आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा प्रदान करें, जिससे आंदोलनकारियों का सम्मान सुरक्षित रह सके और उत्तराखंड का गौरव बना रहे।
इस अवसर पर चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय प्रवक्ता महेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन एक जनआंदोलन था, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारी जल, जंगल, जमीन और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
महेश जोशी ने कहा कि पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य होने के कारण उत्तराखंड विकास की दौड़ में पीछे रह गया है। सीमांत क्षेत्रों और वन भूमि की अधिकता के चलते राज्य को विशेष संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने हिमालयी राज्यों को संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुरूप विशेष अधिकार देने की मांग भी उठाई।
उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों की मांगों के समर्थन में नवंबर माह में प्रदेशभर के राज्य आंदोलनकारी, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि देहरादून में एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे।

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