“पहले अपना विभाग संभालें, फिर राहुल गांधी पर सवाल उठाएं” – गरिमा मेहरा दसौनी का सुबोध उनियाल पर तीखा पलटवार

कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा – 16 करोड़ का पुल 16 दिन में क्यों धंसा, डंडी-कंडी से कब मिलेगी मुक्ति?

“किस नैतिक अधिकार से पूछ रहे सवाल” – दसौनी का तीखा हमला

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। दसौनी ने कहा कि उनियाल पहले यह बताएं कि वे किस नैतिक अधिकार और किस उपलब्धि के आधार पर राहुल गांधी से सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और युवाओं, छात्रों व लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है।

झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर उनियाल द्वारा लगाए गए दोहरे चरित्र के आरोप पर दसौनी ने कहा कि झारखंड सरकार ने छात्रों से कई दौर की बातचीत कर उनकी अनेक मांगों पर कार्रवाई की है, जिसमें तीन JPSC परीक्षाएं रद्द करने की सहमति और शीर्ष स्तर पर इस्तीफे शामिल हैं। बावजूद इसके 10 अगस्त को छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग हुआ, जिस पर राहुल गांधी ने सवाल उठाए। दसौनी ने कहा कि छात्रों पर लाठी चलाकर विपक्ष से सवाल पूछने से सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं होती।

दसौनी ने पूछा कि उत्तराखंड में पिछले वर्षों में भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं और पेपर लीक ने हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया, तब सरकार को जवाबदेह कौन बनाएगा।

दसौनी ने उनियाल के अपने विभाग की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में आज भी गर्भवती महिलाओं और मरीजों को डंडी-कंडी और स्ट्रेचर के सहारे सड़क तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने देहरादून में 16 करोड़ रुपये की लागत से बने नंदा की चौकी पुल का जिक्र करते हुए कहा कि 12 जुलाई को खुला यह पुल महज 16 दिन बाद 28 जुलाई को क्षतिग्रस्त हो गया।

दसौनी ने पूछा कि क्या राहुल गांधी स्वास्थ्य विभाग के मंत्री हैं या उन्होंने पुल बनवाया था। उन्होंने कहा कि उनियाल का काम अपनी सरकार की नाकामियों पर पर्दा डालना नहीं, बल्कि अपना विभाग ठीक करना है।

दसौनी ने कहा कि नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में लाखों छात्रों से जुड़ी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं और छात्रों की आवाज उठाना राहुल गांधी का अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम है।

दसौनी ने मंत्री से पूछा कि स्वास्थ्य व्यवस्था कब सुधरेगी, पहाड़ की महिलाओं को डंडी-कंडी से कब मुक्ति मिलेगी, अस्पतालों में सम्मानजनक इलाज कब मिलेगा और करोड़ों के पुल 16 दिन में क्यों धंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उनियाल को स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी दी है, राहुल गांधी पर टिप्पणी की नहीं।

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