

देहरादून: जरा सोचिए… आपके घर की घंटी बजे, आप दरवाजा खोलें और सामने मुस्कुराते हुए खाकी वर्दी में पुलिस अधिकारी खड़े हों! पहली नज़र में तो किसी की भी सांसें थम जाएं, लेकिन देहरादून में जब यह हुआ, तो डर की जगह घर-घर में खुशियां खिल उठीं और बजुर्गों ने पुलिस वालों के सिर पर हाथ रखकर दिल खोलकर आशीर्वाद दिया।
आखिर क्या है पूरा माजरा? क्यों अचानक ‘दून पुलिस’ पहुंच गई शहर के बुजुर्गों के सीधा द्वार? आइए जानते हैं इस दिल छू लेने वाली खबर का पूरा ड्रामा और सस्पेंस!
जब खाकी का मिला ‘जादुई स्पर्श’
21 अगस्त को ‘विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस’ के मौके पर कप्तान साहब यानी एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र डोबाल ने एक ऐसी चाल चली, जिसने पूरे शहर का दिल जीत लिया। उन्होंने केवल दफ्तर में बैठकर फाइलें निपटाने के बजाय सीधे ‘संयुक्त नागरिक संगठन’ के बुजुर्गों के बीच उतरने का फैसला किया।
एसएसपी साहब ने न सिर्फ दादा-दादी और नाना-नानी की उम्र के इन वरिष्ठ नागरिकों का हाल-चाल जाना, बल्कि उनकी समस्याएं सुनकर अधिकारियों को ऑन-द-स्पॉट एक्शन के निर्देश भी दे दिए। बुजुर्ग भी कप्तान साहब के इस अंदाज़ पर इतने फिदा हुए कि उन्हें तुरंत शॉल ओढ़ाकर VIP जैसा सम्मान दे डाला!

‘अंकल-आंटी, सतर्क रहिए!’ – साइबर ठगों की अब खैर नहीं
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब एसएसपी देहरादून के एक इशारे पर पूरी ‘दून पुलिस’ एक्शन मोड में आ गई। शहर भर के थानों की टीमें अकेले रह रहे बुजुर्गों (Single Senior Citizens) के घर-घर पहुंचीं।
पुलिस वालों ने सिर्फ चाय-पानी पर चर्चा नहीं की, बल्कि बुजुर्गों को डिजिटल ज़माने के सबसे बड़े ‘विलेन’—यानी साइबर अपराधियों से बचने के गुरुमंत्र भी दिए।
- फर्जी कॉल से कैसे बचें?
- ओटीपी (OTP) क्यों न शेयर करें?
- आपातकाल में किस नंबर पर डायल करें?
पुलिस ने हर बुजुर्ग के हाथ में कंट्रोल रूम और बड़े अफसरों के पर्सनल मोबाइल नंबर थमा दिए, ताकि कोई भी ठग उन्हें परेशान करने की हिम्मत न कर सके।
आंसुओं में घुली मुस्कान और खाकी को मिला आशीर्वाद
जिस पुलिस से लोग अक्सर दूरी बनाते हैं, आज वही पुलिस जब घर की चौखट पर बच्चों की तरह हाल-चाल पूछने पहुंची, तो कई बुजुर्गों की आंखें भर आईं। बुजुर्गों ने खाकी वर्दी वालों के सिर पर हाथ रखकर खूब आशीर्वाद दिया और कहा—“जब दून पुलिस हमारे साथ है, तो हमें डरने की क्या बात है!”

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