

नैनीताल/हल्द्वानी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर चला विवाद अब कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है, जबकि पुलिस ने अधिवक्ता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। बेंगलुरु में पहले से दर्ज जीरो एफआईआर भी जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित होने वाली है।
क्या है पूरा मामला
8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा हुई थी। इसके कुछ दिन बाद (करीब 10-11 अगस्त) एक संगठन (श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास) द्वारा वहां हवन और गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ की रस्म निभाई गई। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम के बाद जगह की साफ-सफाई और पवित्रता बहाल करने के लिए किया गया। कांग्रेस ने इसे दलित समुदाय का अपमान और अस्पृश्यता का प्रतीक बताया। खड़गे ने मामले को राज्यसभा में उठाया और कार्रवाई की मांग की।
हाईकोर्ट में सुनवाई
देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ चौहान ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज व अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
7 सितंबर को वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामले में दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं—एक हल्द्वानी में और दूसरी बेंगलुरु में मीडिया रिपोर्ट/शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर। बेंगलुरु की जीरो एफआईआर जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित की जाएगी। सरकार ने निष्पक्ष जांच और सभी सीसीटीवी फुटेज तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका निस्तारित कर दी।
बेंगलुरु में जीरो एफआईआर
4 सितंबर को बेंगलुरु के विधान सौधा थाने में आदिवासी कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारी टी.आर. रामप्पा की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज हुई। इसमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं का उल्लेख है। यह एफआईआर अज्ञात लोगों तथा कुछ भाजपा नेताओं के खिलाफ बताई गई है और अब हल्द्वानी पुलिस को स्थानांतरित होने वाली है।
अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर हल्द्वानी में एफआईआर
8 सितंबर को हल्द्वानी कोतवाली में अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अंजू की लिखित शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (समूहों के बीच शत्रुता या नफरत फैलाना), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) के तहत मामला दर्ज किया। नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टी.सी. ने जांच एसपी (क्राइम) डॉ. जगदीश चंद्र को सौंप दी है। जांच के बाद आरोपियों की नामजदगी होने की उम्मीद है।
अधिवक्ता अंजू ने बताया कि उन्होंने 15 अगस्त को ही तहरीर दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर शिकायत की थी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ी हैं।
आगे की स्थिति
पुलिस को पूरे राज्य से इस मामले में दर्जनों शिकायतें मिली थीं। अब जांच तेज हो गई है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जा रहे हैं। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर प्रतिक्रियाएं दी हैं। कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव बता रही है, जबकि दूसरी तरफ इसे सामान्य धार्मिक रस्म और राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया जा रहा है।
मामला अभी जांच के अधीन है। पुलिस आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई करेगी।

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