ठोस कचरा प्रबंधन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अहम, उत्तराखंड के सभी 1314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कलेक्शन

देहरादून। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यह बात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कही।

मंगलवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) देहरादून द्वारा सचिवालय मीडिया सेंटर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 और लेगेसी वेस्ट पर जानकारी दी गई।

डॉ. धकाते ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों में कचरे को चार श्रेणियों – गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे में बांटने पर जोर दिया गया है। बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है और ऑनलाइन निगरानी, डिजिटल पंजीकरण का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के 108 शहरी निकायों के 1314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो रहा है। राज्य में 1515 कचरा वाहन हैं, नए वाहनों में चार कंपार्टमेंट लगाए जा रहे हैं। प्रतिदिन 1930 मीट्रिक टन कचरे में से 93.46 प्रतिशत का प्रसंस्करण हो रहा है। 61 लेगेसी डंपसाइट में से 23.34 लाख टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख टन का उपचार हो चुका है। दिसंबर 2026 तक सभी पुराने कचरे के निस्तारण का लक्ष्य है। राज्य में 85 एमआरएफ, 663 कंपोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित हैं।

अपर निदेशक शहरी विकास प्रवीण कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जीरो डंपसाइट लक्ष्य पर काम हो रहा है। चारधाम और पर्यटन क्षेत्रों के लिए कचरा प्रबंधन की विशेष योजना बनाई जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों से यूजर चार्ज वसूला जाएगा और होटलों को गीले कचरे का विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण करना होगा। कचरा वाहनों में वीएलटीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जा रहा है।

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