

देहरादून। लोक भवन में बुधवार को नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि नशा मुक्त समाज के लिए संकल्प, संवाद और सामुदायिक एकजुटता जरूरी है और इसे केवल सरकारी प्रयास तक सीमित न रखकर जन-आंदोलन बनाना होगा।
कार्यक्रम में ‘नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र’ जारी किया गया। इसमें युवाओं को नशे से दूर रखने में परिवार की भूमिका मजबूत करने, नशे के आदी लोगों के उपचार एवं पुनर्वास और समाज की भागीदारी बढ़ाने सहित दस प्रमुख संकल्प शामिल हैं।
कार्यक्रम में दो विशेष परिचर्चाएं हुईं। पहली ‘व्यसन मुक्त, सशक्त शैक्षणिक संस्थान’ पर हुई, जिसका संचालन अनूप नौटियाल ने किया। इसमें दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, ललित जोशी, प्रो. संजय जसोला और डॉ. विजय धस्माना ने विचार रखे। दूसरी परिचर्चा ‘नशा मुक्त समाज-समुदाय आधारित’ विषय पर हुई, जिसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने किया। इसमें विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, डॉ. सलोनी, डॉ. तृप्ता ठाकुर और आईजी निलेश आनंद भरणे ने भाग लिया।

राज्यपाल ने कहा कि नशा व्यक्ति के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी चुनौती है। युवाओं की ऊर्जा को खेल, शिक्षा और कौशल विकास की ओर मोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि नशे से बाहर निकलने में मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल ने स्वागत उद्बोधन दिया। दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश दिया। राज्यपाल ने डॉ. रोहित रस्तोगी की पुस्तक ‘नशा मुक्त नव-निर्माण’ का विमोचन किया और सभी को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति डॉ. देवेंद्र भसीन, सचिव शैलेश बगोली, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन सहित शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


Recent Comments