नशा मुक्त राजधानी के लिए जिला प्रशासन ने कसी कमर, तस्करों पर ऑन द स्पॉट मुकदमा, शिक्षण संस्थानों में मास टेस्टिंग
देहरादून । मुख्यमंत्री के ‘‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’’ विजन को साकार करने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाते हुए नशा उन्मूलन के लिए व्यापक रणनीति लागू कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए बहुस्तरीय कार्रवाई की रूपरेखा तय की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि फार्मा पदार्थों में मिलावट और नशा बेचने वालों पर अब संगीन धाराओं में ऑन द स्पॉट मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जिले में संचालित मेडिकल स्टोर और दवा फैक्ट्रियों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को तत्काल ड्रग्स टेस्टिंग किट क्रय करने हेतु मौके पर ही फंड स्वीकृत किया। उच्च शिक्षण संस्थानों में मास लेवल ड्रग्स टेस्टिंग के लिए 6 हजार टेस्ट किट खरीदी गई हैं। सरकारी और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में विशेष टास्क फोर्स के माध्यम से यह अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक माह एंटी ड्रग्स गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी।

स्कूलों में गठित एंटी ड्रग्स समितियों को सीधे एसटीएफ से लिंक करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि त्वरित सूचना और कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। पब्लिक के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 और एनसीवी मानस पोर्टल का प्रचार-प्रसार बैनर व पोस्टर के माध्यम से किया जाएगा। प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
रायवाला स्थित ओल्ड एज होम को शीघ्र नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नशा मुक्ति केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थानीय पुलिस व पटवारी से रिपोर्ट ली जाएगी। विद्यालयों के आसपास संभावित नशा क्षेत्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि राजधानी में नशा तस्करों के लिए कोई जगह नहीं है। मादक पदार्थों की डिमांड और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और औषधि नियंत्रक सहित सभी प्रवर्तन एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विगत वर्षों के विश्लेषण के आधार पर नेटवर्क और लिंकेज की पहचान की जाएगी।
सड़कों पर यातायात जांच के दौरान ड्रग्स टेस्टिंग की जाएगी। आशा वर्कर, सेविका और सहायिका के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि नागरिक नशे के दुष्प्रभावों से बच सकें और हेल्पलाइन के माध्यम से प्रशासन को सूचना दे सकें।

बैठक में डीएफओ मयंक गर्ग, अपर जिलाधिकारी जय भारत सिंह, एसडीएम हरिगिरी, स्मृता परमार, अपर्णा ढौडियाल, सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, जिला आबकारी अधिकारी वीरेन्द्र जोशी, समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, तहसीलदार कालसी सुशीला कोठियाल सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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