देहरादून। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने इन नियमों को जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए भेदभावपूर्ण बताते हुए तत्काल संशोधन की मांग की है, वरना उत्तराखंड में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला अधिकारी के माध्यम से गुरुवार को यह ज्ञापन भारत सरकार को भेजा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि UGC के नए नियम जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित रखते हैं, जबकि जनरल कैटेगरी छात्रों के खिलाफ होने वाले किसी भी भेदभाव या फर्जी शिकायतों की कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। इससे कैंपस में डर का माहौल बनेगा और छात्रों की पढ़ाई व अभिव्यक्ति प्रभावित होगी।
प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने कहा, “UGC के ये नियम समानता के नाम पर जनरल कैटेगरी छात्रों के साथ अन्याय कर रहे हैं। फर्जी शिकायतों से सुरक्षा का प्रावधान हटाने से उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि सभी वर्गों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करते हुए नियमों में संशोधन करें।”
देहरादून जिला अध्यक्ष नवीन पंत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “पहले से ही सीमित सीटें, कठिन प्रतिस्पर्धा और ऊंची फीस से जूझ रहे जनरल छात्र अब और कमजोर हो जाएंगे। पार्टी राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी और जनता को जागरूक करेगी। सरकार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न करे।”
वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल ने जोड़ा, “उच्च शिक्षा में समानता के बहाने नई असमानता पैदा हो रही है। जनरल कैटेगरी की आवाज दबाना सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाएगा। पर्यावरण शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। केंद्र सरकार संतुलित प्रावधान जोड़े।”
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, UGC नियमों में इक्विटी कमिटी में SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन जनरल कैटेगरी को कोई स्थान नहीं। फर्जी शिकायतों पर दंड का प्रावधान भी हटा दिया गया, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ी है। पार्टी ने इसे उच्च शिक्षा में नई विभाजन रेखा बताया।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि संशोधन न होने पर उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। जिला अधिकारी ने ज्ञापन ग्रहण कर इसे उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल, महानगर अध्यक्ष नवीन पंत, जिला अध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ भगवती प्रसाद गोस्वामी, वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ योगेश ईष्टवाल, महिला प्रकोष्ठ महानगर अध्यक्ष सोभित भद्री, शशी रावत, मंडल अध्यक्ष रजनी कुकरेती, प्रचार सचिव शांति चौहान, हेमा कोटनाला सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पार्टी ने इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है, जो उच्च शिक्षा नीति पर नई बहस छेड़ सकता है।

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