देहरादून। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) परिसर का दौरा किया और यहां राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र (एनआरआरसी) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य भारत की नदियों और मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों पर वैज्ञानिक ज्ञान को मजबूत करना तथा उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है। मंत्री ने गंगा नदी को देश की सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और आर्थिक जीवनरेखा बताते हुए कहा कि नदी की स्वच्छता और जैवविविधता का संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
कार्यक्रम के दौरान श्री पाटिल ने गंगा भवन का भी लोकार्पण किया और केंद्र की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों की जानकारी ली। गंगा सभागार में एमएससी छात्रों, शोधकर्ताओं और परियोजना प्रतिनिधियों के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें गंगा संरक्षण, जलीय जैवविविधता, सामुदायिक सहभागिता तथा आजीविका आधारित संरक्षण मॉडलों पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो गंगा में जलीय जीवों के संरक्षण और आपदा कालीन बचाव कार्यों को मजबूत करेगी। इसके अलावा, “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत गंगा भवन प्रांगण में वृक्षारोपण भी किया गया।

संस्थान के प्रेक्षागृह में डब्ल्यूआईआई निदेशक द्वारा स्वागत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जबकि डीन एवं परियोजना नोडल अधिकारी डॉ. रूचि बडोला ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी)-डब्ल्यूआईआई की “गंगा एवं जैवविविधता संरक्षण परियोजना” की अब तक की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रस्तुति दी। केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों, विशेष रूप से गंगा प्रहरियों के साथ संवाद किया और नदी तथा जलीय जीव संरक्षण के उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी हुआ, जिसमें “गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल (Gavialis gangeticus) की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना” तथा “Millets for Life” पुस्तक शामिल हैं। साथ ही, टीएसए फाउंडेशन इंडिया की रिपोर्ट “उत्तर प्रदेश में गंगा नदी घाटी के अंतर्गत संकटग्रस्त कछुओं का संरक्षण, पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास” का विमोचन किया गया। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना का औपचारिक शुभारंभ तथा टीएसएएफआई की कछुआ संरक्षण परियोजना पर जानकारी साझा की गई। आईयूसीएन प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी अपने विचार रखे।

अपने सम्बोधन में श्री पाटिल ने कहा कि यह नया केंद्र नदी संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और जैवविविधता संवर्धन के राष्ट्रीय प्रयासों में नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए बधाई दी तथा केंद्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह उद्घाटन एनएमसीजी की गंगा संरक्षण पहलों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नदियों की पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।

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