देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस पर विशेष गोष्ठी आयोजित कर उन्हें नमन किया। धर्म-रक्षा, राष्ट्रवाद और सर्वोच्च आत्मबलिदान के प्रतीक गुरुजी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है और आज भी समाज को प्रेरणा देता है।
सोमवार को राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु बसाए गए ‘भगवान बिरसा मुंडा नगर’ में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी ने अन्याय को स्वीकारने से इंकार करते हुए चाँदनी चौक में अपना शीश समर्पित कर दिया था। इस बलिदान को अधिवेशन में पुनर्जीवित करने के लिए दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब से पवित्र जल लाकर अधिवेशन स्थल पर स्थापित किया जाएगा, जिससे गुरुजी के अप्रतिम बलिदान को श्रद्धांजलि दी जा सके।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि सत्रहवीं शताब्दी में मुगल अत्याचारों के विरुद्ध गुरु तेग बहादुर जी ने केवल सिखों के गुरु के रूप में नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक आत्मा के प्रतिनिधि के रूप में अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। वहीं राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री आशीष चौहान ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को गुरुजी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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