पत्रकार को धमकाने का आरोप: महारा बोले- लोकतंत्र की हत्या पर तुली है धामी सरकार।

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता करण महारा ने राज्य की भाजपा सरकार पर एक पत्रकार को उसके सवालों की कीमत चुकाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। महारा ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ पत्रकार अजित राठी द्वारा सरकार के एक भूमि आवंटन संबंधी फैसले पर सवाल उठाने के बाद, प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल करके उन्हें लीगल नोटिस भेजा गया और उनके घर पुलिस को उतारकर उनके परिवार को डराया-धमकाया गया।

महारा ने सोमवार को यहां जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “यह ‘डबल इंजन की सरकार’ नहीं, बल्कि ‘दबंग इंजन की सरकार’ का चेहरा है, जो जनता के सवालों का जवाब देने की बजाय, सवाल पूछने वालों को ही जेल भेजने पर आमादा है।”

आईटी पार्क की जमीन की लूट पर सवाल उठाने पर पड़ी एवज
करण महारा ने बताया कि यह विवाद देहरादून स्थित आईटी पार्क की कीमती सरकारी जमीन को 90 साल की लीज पर एक निजी बिल्डर को दिए जाने के सरकार के फैसले से शुरू हुआ। उन्होंने कहा, “जिस जमीन पर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और आईटी उद्योग के सपने सजे थे, उसी जमीन को अब एक बिल्डर को सौंप दिया गया है, जहां अब फ्लैट्स बिकेंगे। जब पत्रकार अजित राठी जी ने जनहित में इस लूट पर सवाल उठाया, तो सरकार तिलमिला गई।”

लीगल नोटिस और पुलिस का दबाव सरकार की कायरता का प्रमाण
महारा ने सरकार की कार्रवाई को ‘कायरतापूर्ण’ बताते हुए कहा, “सरकार ने जनता का सवाल दबाने के लिए पहले लीगल नोटिस का सहारा लिया और जब वहां बात नहीं बनी, तो पुलिस को उनके घर के दरवाजे पर खड़ा कर दिया। लगातार तीन दिन तक पुलिस का उनके घर आना-जाना और परिवार को डराने-धमकाने की यह कोशिश लोकतंत्र के लिए कलंक है।”

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे सवाल किया, “मुख्यमंत्री जी, क्या उत्तराखंड में अब पत्रकारिता एक अपराध बन गई है? क्या आपकी सरकार इतनी असहिष्णु और संवेदनहीन हो गई है कि उसे एक पत्रकार की कलम से भी खतरा महसूस होने लगा है?”

कांग्रेस हर उस आवाज के साथ खड़ी है जो सच बोलती है
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी इस लड़ाई में पत्रकार अजित राठी और जनहित में सवाल उठाने वाले हर व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “धामी सरकार भूल रही है कि लोकतंत्र में कलम तलवार से ताकतवर होती है। नोटिस भेजने से सवाल नहीं मरते, पुलिस भेजने से सच्चाई नहीं दबती। जब जनता जागती है, तो सत्ता कांपती है। सरकार की यह कोशिश निश्चित रूप से विफल होगी।”

महारा ने निष्कर्ष के तौर पर कहा, यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हर नागरिक के अभिव्यक्ति के अधिकार का मामला है। हम जनता से पूछते हैं: क्या इस राज्य में लोकतंत्र अब सिर्फ सरकार की सुविधा का खिलौना रह गया है ?

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments