धराली के बाद अब थराली में बादल फटा…

युद्धस्तर पर राहत-बचाव अभियान, मुख्यमंत्री धामी ले रहे हर पल की जानकारी

चमोली।  उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने की घटना से हुई तबाही के बाद अब चमोली के थराली तहसील में देर रात बादल फटने से काफी नुकसान होने की आशंका है। बादल फटने से काफी मलबा आया है, जिससे एसडीएम आवास समेत कई मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए है। बारिश और मलबे ने भारी तबाही मचाई है। थराली बाजार और आसपास के क्षेत्रों में कई मकान क्षतिग्रस्त हुए, दुकानों में मलबा भर गया और कई वाहन दब गए। प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं और मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन तथा जिलाधिकारी संदीप तिवारी से हर पल का अपडेट ले रहे हैं।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शनिवार सुबह राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर थराली में जारी अभियान की समीक्षा की और जिलाधिकारी को पेयजल, विद्युत और संचार आपूर्ति को तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत व बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहनी चाहिए और आवश्यक संसाधन तुरंत घटनास्थल पर पहुंचाए जाएं।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि टूनरी गदेरे में देर रात डेढ़ बजे अतिवृष्टि के चलते थराली बाजार में भारी मलबा आ गया। एसडीएम आवास सहित कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और चेपड़ो व कोटद्वीप बाजार की दुकानें मलबे से भर गईं। अब तक एक युवती का शव बरामद हुआ है जबकि एक अन्य व्यक्ति की तलाश जारी है। मुख्यमंत्री धामी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने तथा भोजन, चिकित्सा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी स्वयं ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं और राहत कार्यों का पर्यवेक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द हालात सामान्य हों। फिलहाल थराली, देवाल और नारायणबगड़ ब्लॉकों के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

राज्य आपातकालीन केंद्र से भी राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों ने सेना, एसएसबी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना कीं। पांच जेसीबी मलबा हटाने के लिए तैनात की गई हैं जबकि गौचर में यूकाडा का हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर रखा गया है, हालांकि खराब मौसम के चलते उड़ान फिलहाल संभव नहीं हो सकी है।

लगभग 150 लोग प्रभावित हुए हैं, जिन्हें तहसील परिसर में ठहराया गया है। उनके लिए भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन ने सतलुज जल विद्युत निगम का विश्राम गृह और जीएमवीएन गेस्ट हाउस को राहत शिविर के लिए अधिसूचित कर दिया है।

अब तक की जानकारी के अनुसार 10 से 12 घर पूरी तरह मलबे से भर गए हैं, 20 से 25 घरों में आंशिक क्षति हुई है और दो घर पूरी तरह ढह गए हैं। कई मार्ग बाधित हुए हैं और विद्युत आपूर्ति प्रभावित है। भारी बारिश और भूस्खलन के बीच जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की 150 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की टीम लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी है।

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