अक्षय तृतीया 2026: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह दिन ऐसा माना जाता है जब बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी हर कार्य सफल और मंगलकारी होता है। इसी वजह से इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है। वर्ष 2026 में भी अक्षय तृतीया का पर्व विशेष महत्व लेकर आ रहा है, जहां लोग बिना पंचांग देखे विवाह, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
क्या होता है अबूझ मुहूर्त
‘अबूझ मुहूर्त’ का अर्थ है ऐसा समय जिसे जानने या गणना करने की आवश्यकता न हो। सामान्यतः किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखकर सही समय निकाला जाता है, लेकिन अक्षय तृतीया पर यह नियम लागू नहीं होता। इस दिन पूरा समय ही शुभ माना जाता है, इसलिए इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता, यानी ‘अक्षय’ बना रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था। साथ ही, यह दिन दान-पुण्य, जप-तप और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन किए गए सत्कर्म कई गुना फल देते हैं।
क्यों नहीं देखना पड़ता पंचांग
अक्षय तृतीया को इतना शुभ माना गया है कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अपने आप अनुकूल मानी जाती है। सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च स्थिति में होते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय गणना के भी विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या खरीदारी जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य
अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदना, नया घर लेना, व्यवसाय शुरू करना या शादी जैसे कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा, गरीबों को दान देना, जल सेवा करना और भगवान की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी होता है। यह दिन नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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