देहरादून: उत्तराखंड पेयजल निगम में पिछले आठ वर्षों के दौरान 2,660 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा है। यह दावा एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के हवाले से सामने लाया गया है।
आरोप है कि वर्ष 2016 से लेकर मई 2024 तक की अवधि में निगम के वित्तीय प्रबंधन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। आरटीआई कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इसे महज अनियमितता नहीं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से हुआ एक संगठित आर्थिक अपराध बताया है।
CAG रिपोर्ट में उजागर आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न वर्षों में दर्ज की गई वित्तीय गड़बड़ियों का विवरण इस प्रकार है:
· 2016-17: 92.41 करोड़ रुपये
· 2019-20: 656.05 करोड़ रुपये
· 2020-21: 829.90 करोड़ रुपये
· 2021-22: 43.48 करोड़ रुपये
· 2022-23: 96.99 करोड़ रुपये
· 2023-24: 803 करोड़ रुपये
· 2024-25 (मई तक): 38.41 करोड़ रुपये
आरोपों में शामिल प्रमुख मामले:
· कई ठेकेदारों द्वारा जीएसटी का भुगतान न करना, लेकिन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना।
· कार्य पूरा किए बिना और बैंक गारंटी जमा न कराए ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर देना।
· निर्माण कार्यों में खराब गुणवत्ता और रॉयल्टी वसूली में लापरवाही।
नेगी ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि इतनी गंभीर रिपोर्ट अभी तक विधानसभा में पेश क्यों नहीं की गई। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की जांच एक उच्चस्तरीय समिति, SIT, विजिलेंस या CBI से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला जनता के धन के दुरुपयोग का है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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