देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में ऐतिहासिक रैली को सभी आंगनबाड़ी बहनों के अभूतपूर्व सहयोग का परिणाम बताया गया। खत्री ने कहा कि बहनों की एकजुटता और विशाल उपस्थिति ने रैली को ऐतिहासिक सफलता दिलाई और सरकार को गंभीर वार्ता के लिए मजबूर किया।
रैली के पश्चात संगठन ने अपना ज्ञापन डायरेक्टर को सौंपा। छह सूत्रीय मांग पत्र के पहले और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे—मानदेय वृद्धि—पर विस्तृत चर्चा हुई। संगठन ने स्पष्ट कर दिया कि 1600 रुपए की वृद्धि किसी भी आंगनबाड़ी बहन को स्वीकार नहीं है। रैली के दबाव के बाद विभाग ने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित कमेटी की अनुशंसा पर 5000 रुपए मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव कल ही शासन को भेजा जाएगा।
सुशीला खत्री ने बताया कि प्रदेश में सुपरवाइजर के रिक्त पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्त्रियों के प्रमोशन किए जाएंगे, और एक माह के भीतर विज्ञप्ति जारी करने पर विभागीय सहमति बनी है। सेवानिवृत्ति लाभों के मुद्दे पर भी बड़ी प्रगति हुई है, जिसके अनुसार 2026 से सेवानिवृत्त होने वाली बहनों को महिला कल्याण कोष से 1 लाख रुपए दिए जाने की सहमति विभाग ने जताई।

तकनीकी समस्याओं पर भी विभाग ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। फेस कैप्चर प्रणाली और पोषण ट्रैकर में आ रही दिक्कतों को लेकर बताया गया कि भारत सरकार को तत्काल पत्र भेजा जाएगा और प्रणाली में सुधार किए जाएंगे।
खत्री ने सभी आंगनबाड़ी बहनों को सूचित किया कि 3 दिसंबर 2025 को संगठन और विभाग के उच्च अधिकारियों के बीच औपचारिक बैठक होगी, जिसमें सभी मांगों पर लिखित समझौता किया जाएगा। उन्होंने साफ किया—
“बिना लिखित समझौते के आंदोलन स्थगित नहीं होगा। सभी केंद्र फिलहाल बंद रहेंगे और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मंगलवार की वार्ता में समझौते पर लिखित हस्ताक्षर नहीं हुए, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। यह बात ज्ञापन सौंपते समय भी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बता दी गई।

सुशीला खत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन का यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और बहनों की एकता ने सरकार पर स्पष्ट दबाव बना दिया है।

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