देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी ने 12 नवंबर 2025 को आयोजित प्रेस वार्ता में सरकार और विभाग द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं की समस्याएँ और माँगें वर्षों से लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए वे लगातार सरकार और विभाग को अवगत कराती आई हैं, मगर उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कई बार मुख्यमंत्री आवास एवं सचिवालय का घेराव किया गया। वर्ष 2024 में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं ने बड़ा आंदोलन चलाया था, जिसके बाद सरकार ने भर्तियों और समस्याओं के समाधान के लिए समिति गठन का आश्वासन दिया था, लेकिन वह समिति केवल कागज़ों तक ही सीमित रह गई। समिति से अभी तक कोई ठोस जानकारी संघ को नहीं दी गई है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की उदासीनता के चलते 30 अक्टूबर 2025 को विशाल रैली कर सचिवालय घेराव किया गया था। उस दौरान मुख्यमंत्री के कोऑर्डिनेटर हरीश कोठारी ने आश्वासन दिया था कि 10 नवंबर तक मुख्यमंत्री राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रम में व्यस्त हैं उसके बाद संघ की प्रतिनिधियों की वार्ता मुख्यमंत्री से कराई जाएगी। लेकिन 12 नवंबर बीतने तक भी सरकार की ओर से किसी ने संगठन से संपर्क नहीं किया।
संघ प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय मंत्री रेखा आर्य से भी भेंट कर ज्ञापन सौंपा, जिनके द्वारा भी राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रमों के बाद समस्याओं पर विचार करने का भरोसा दिया गया था। परंतु न तो मुख्यमंत्री और न ही मंत्री की ओर से कोई ठोस पहल की गई। प्रशासनिक स्तर पर भी संगठन की समस्याओं पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं से विभागीय कामों के अलावा अन्य विभागों का भी कार्य लिया जा रहा है, जिसके कारण उनका कार्यभार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद उनका शोषण किया जा रहा है और मानदेय में वृद्धि नहीं की जा रही। गुजरात हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को उनके कार्य के एवज में कम से कम 24,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाना चाहिए।

संघ ने आरोप लगाया कि विभाग का नाम ‘महिला सशक्तिकरण’ है, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकार्तियों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण व्यवहार हो रहा है।
सरकार की लगातार अनदेखी से क्षुब्ध होकर प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया गया कि 14 नवंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और क्रमिक अनशन प्रारंभ किया जाएगा। संघ ने साफ कहा कि उनकी जायज़ माँगें माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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