देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया गया क्रमिक अनशन मंगलवार को 11वें दिन भी जारी रहा। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा और यदि जल्दी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को उग्र रूप दे दिया जाएगा।
मुख्य मांगें
अनशन पर बैठी कार्यकर्त्रियों ने अपनी प्रमुख मांगों को फिर से रेखांकित किया:
· मानदेय में वृद्धि करते हुए 800 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मासिक 24,000 रुपए किया जाए।
· ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत को लागू किया जाए।
· मार्च 2024 में मानदेय वृद्धि के लिए गठित कमेटी के निर्णयों की जानकारी तुरंत दी जाए।
· सुपरवाइजर के रिक्त पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रमोशन किया जाए और शीघ्र नई भर्तियाँ की जाएं।
· सेवानिवृत्ति पर महिला कल्याण कोष से 5 लाख रुपए की एकमुश्त राशि और पेंशन की सुविधा दी जाए।
· सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान किया जाए।
· फेस कैप्चर प्रणाली को या तो बंद किया जाए या उसमें सुधार किया जाए।
श्रीमती खत्री ने कहा, “हमारा संघर्ष न्यायोचित है और इस बार हम बिना अपनी मांगें पूरी हुए आंदोलन वापस नहीं लेंगे। सरकार ने मानदेय वृद्धि के मामले में समय-समय पर केवल आश्वासन ही दिए हैं, जबकि ठोस कदम नहीं उठाए गए। हमारा धैर्य अब टूट रहा है।”

आज के क्रमिक अनशन में कस्तूरी, उर्मिला, सावित्री, रेखा, उमा प्रधान, निर्मला, तनु, सुनीता, आनंदी ममगाई, भुवनेश्वरी, प्रीति पांडे और बिना अरोड़ा सहित सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने हिस्सा लिया और सरकार से अपनी मांगों को शीघ्र मानने की अपील की। इस आंदोलन से सरकार के सामने एक नई चुनौती उत्पन्न हुई है और अब उसके ठोस हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।

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