नई दिल्ली ,05 अपै्रल(आरएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पीएसएलवी ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म एक्सपेरिमेंट मॉड्यूल (पीओईएम-4) का चौथा संस्करण सफलतापूर्वक पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश कर गया। यह मॉड्यूल 4 अप्रैल 2025 को भारतीय समयानुसार सुबह 8:03 बजे हिंद महासागर में टकराया। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पीओईएम-4 को पृथ्वी की ओर लाने का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे को कम करना था। यह कदम अंतरिक्ष पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल है।
अपने मिशन जीवनकाल के दौरान, पीओईएम-4 ने कुल 24 पेलोड्स—जिसमें 14 इसरो के और 10 विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं के थे—का सफलतापूर्वक संचालन किया। इन पेलोड्स से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा प्राप्त हुआ, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए उपयोगी साबित होगा। इसरो ने आगे बताया कि पीओईएम-4 को एक सुरक्षित और अपेक्षित कक्षा (350 किमी) में लाने के लिए उसके इंजन को सक्रिय किया गया। आकस्मिक टूट-फूट और संभावित खतरों को टालने के लिए मॉड्यूल को निष्क्रिय करते समय उसमें बचा हुआ ईंधन भी निकाला गया। इसरो की यह पहल न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरिक्ष में जिम्मेदार संचालन की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
क्या है पीओईएम-4?
पीओईएम-4, इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (क्कस्रुङ्क-ष्ट60) के पुन: उपयोग किए गए ऊपरी चरण पर आधारित एक प्रयोगात्मक मंच है। इसे 30 दिसंबर 2024 को क्कस्रुङ्क-ष्ट60 के जरिए लॉन्च किया गया था। इस मिशन में जुड़वां स्पेडेक उपग्रहों को 475 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया, जिसके बाद पीओईएम-4 को लगभग उसी कक्षा में सक्रिय किया गया।
इसरो को एक और बड़ी कामयाबी, पीओईएम-4 मॉड्यूल सफलतापूर्वक पृथ्वी के वायुमंडल में लौटा
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