एंटी-एजिंग दवाओं-सेवाओं के कारोबार

अमित बैजनाथ गर्ग
हाल में मॉडल-अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की कार्डियक अरेस्ट के चलते 42 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई। उनके कार्डियक अरेस्ट आने की वजह एंटी-एजिंग दवाओं का सेवन भी बताई जा रही है।
शेफाली सात-आठ सालों से ये दवाएं ले रही थीं। जिस दिन उनकी मौत हुई उस दिन उनका व्रत था। वह खाली पेट भी इन दवाओं को ले रही थीं। असल में पिछले कुछ सालों में लोगों में उम्र को छिपाने और जवान दिखने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके लिए वे जम कर पैसा बहा रहे हैं।
अगर एंटी-एजिंग दवाओं-सेवाओं के कारोबार की बात की जाए तो यह देश में तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कॉस्मेटिक यानी सर्जरी एवं फिलर्स ट्रीटमेंट और दवाइयां, दोनों शामिल हैं। यह बाजार त्वचा की देखभाल, झुर्रियां हटाने और उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने वाली दवाओं और उत्पादों की बढ़ती मांग से प्रेरित है। एक अनुमान के मुताबिक, 2023 में देश में एंटी-एजिंग दवाओं-सेवाओं का कारोबार करीब 3,500 करोड़ रु पये का था। 2024 में इसका आकार 4,000 करोड़ रु पये से ज्यादा हो गया। 2035 तक इसके 8,000 करोड़ रु पये से ज्यादा होने की उम्मीद है। यह कारोबार 7-8 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है।
कुछ कंपनियों का दावा है कि यह कारोबार दस साल बाद दस हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का होगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एंटी-एजिंग दवाओं-सेवाओं का कारोबार कितनी तेजी से पैर पसार रहा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि लोगों में जवां दिखने की चाहत तेजी से बढ़ रही है। इनमें 30-50 साल तक की उम्र वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। देश में एंटी-एजिंग उपचार के लिए कई तरह की दवाएं, इंजेक्शन तथा सर्जरी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। इस बिजनेस में दखल रखने वाली कई कंपनियों ने अलग-अलग शहरों में अपने क्लिनिक खोल लिए हैं। मार्केट एक्सपर्ट बताते हैं कि एंटी-एजिंग दवाओं-सेवाओं के मौजूदा कारोबार में अंग्रेजी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयां, स्किन संबंधी कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स, बोटोक्स सर्जरी तथा फिलर्स ट्रीटमेंट के बिजनेस शामिल हैं।
एंटी-एजिंग उपचार वह प्रक्रिया है, जिसमें आपको बढ़ती उम्र में भी जवान दिखाया जाता है। यह त्वचा पर झुर्रियां बढ़ने से रोकने का उपचार है। इसके तहत कॉस्मेटिक, दवाइयां, सर्जरी, इंजेक्शन और कोलेजन सप्लीमेंट्स आते हैं। एंटी-एजिंग उपचार अंग्रेजी के साथ आयुर्वेदिक तरीके से भी करने का दावा किया जाता है। अंग्रेजी कंपनियों के साथ कुछ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक कंपनियों ने भी दवाएं, ब्यूटी प्रॉडक्ट्स और कोलेजन सप्लीमेंट्स बनाने शुरू कर दिए हैं।
कहने का अभिप्राय यह है कि आयुर्वेदिक-होम्योपैथिक कंपनियों की भी अंग्रेजी दवा कंपनियों की तरह इस बाजार पर पूरी नजर है। हालिया कई सर्वे और रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया की तरह भारत में भी एक बड़ी आबादी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देख कर प्रॉडक्ट्स का जम कर उपयोग कर रही है। कई सेलेब्रिटी हैं, जो टीवी और सोशल मीडिया पर इस तरह की दवाओं का प्रचार कर रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि एंटी-एजिंग की कुछ दवाओं में हार्मोन, स्टेरॉयड या अन्य केमिकल्स होते हैं, जो शरीर के नेचुरल सिस्टम से छेड़छाड़ करते हैं। इससे हार्ट और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। हार्मोन बैलेंस भी बिगड़ सकता है। इन दवाओं का लगातार सेवन करना ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से जुड़ी बीमारियों का कारण भी बन सकता है। कई लोगों की स्किन बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है, कुछ को एलर्जी की समस्या भी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि हर किसी को किसी भी नए प्रॉडक्ट का उपयोग करने से पहले एक बार डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह ले लेनी चाहिए। कोई भी दवा या सप्लीमेंट डॉक्टर की देखरेख में इस्तेमाल करने से ही उसके सुरक्षित बने रहने के चांस ज्यादा होते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बिना दवा के भी बढ़ती उम्र में जवान दिखा जा सकता है। इसके लिए फल एवं हरी सब्जियों का सेवन करें। वे एवाकाडो, ब्ल्यूबेरी, हल्दी, नट्स और सीड्स तथा हरी पत्तेदार सब्जियां खाने की सलाह देते हैं। ये फल-सब्जियां कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देते हैं, जिससे त्वचा टाइट और ग्लोइंग बनी रहती है।
वहीं, पालक-मेथी जैसी हरी सब्जियों में विटामिन-के, आयरन और फोलेट होता है, जो ब्लड सकरुलेशन को बेहतर बनाता है। इन सभी को नियमित रूप से डाइट में शामिल करें। इसके साथ हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें। रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें, पूरी नींद लें, भरपूर मात्रा में पानी पिएं और जंक फूड कम से कम खाएं। सबसे जरूरी बात यह है कि दौड़ती-भागती जिंदगी में तनाव का प्रबंधन करें।

( लेख में व्यक्ति विचार निजी हैं)

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