बांग्लादेश में कुछ भी मुमकिन :  आवामी लीग नेता के घर पर हमले से लोगों में नाराजगी

ढाका ,07 मार्च। ढाका के एक पॉश इलाके में इस सप्ताह की शुरुआत में आवामी लीग के एक नेता के घर पर आधी रात को हुए हमले के बाद से लोग खासे नाराज हैं। पुलिस की निष्क्रियता और राजनीति से प्रेरित हमलों को लेकर वे मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
यह घर तनवीर इमाम का था। वह एच टी इमाम के बेटे हैं, जो अपदस्थ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के सलाहकार थे। बुधवार को 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ [जिसमें मुख्यत: छात्र बताए जा रहे हैं] ने फ्लैट में तोडफ़ोड़ की। उन्होंने आरोप लगाया कि घर अंदर अवामी लीग के कार्यकर्ता छिपे हुए हैं और आसपास कहीं अवैध हथियारों और नकदी का एक बड़ा जखीरा भी छिपा हुआ है। हालांकि, तलाशी के बाद उन्होंने कुछ नहीं मिलने की बात स्वीकार की।
सोशल मीडिया पर युवाओं के नेतृत्व में भीड़ द्वारा अवामी लीग विरोधी नारे लगाने और इमारत में तोडफ़ोड़ करने के वीडियो वायरल हो गए।
ढाका पुलिस ने बाद में कहा कि उसने घटना के सिलसिले में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन कई लोगों ने दावा किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तथाकथित तलाशी अभियान के बारे में पहले से ही पता था और वे इसे पहले ही रोक सकते थे।
भीड़ का नेतृत्व बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ सदस्य कर रहे थे, जिन्हें कथित खुफिया जानकारी मिली थी कि अवामी लीग के नेताओं ने अपने घर में हथियारों का जखीरा छिपा रखा है। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 ने रिपोर्ट के मुताबिक कुछ घंटों बाद उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ भी नहीं मिला।
इस घटना पर बांग्लादेशी मानवाधिकार कार्यकर्ता आसिफुर रहमान चौधरी ने एक्स पर लिखा, फिल्मी अंदाज में, उन्होंने अपार्टमेंट का दरवाजा तोड़ा, घर में घुसे और सबकुछ लूट लिया। अब, कोई पूछ सकता है- राजधानी के एक पॉश इलाके में ऐसा कैसे संभव है? बांग्लादेश में, इन दिनों कुछ भी संभव है क्योंकि सरकार खुद ही ऐसी हरकतों को सही ठहराती है।
चौधरी ने कहा, इस भीड़ का सफर मूल रूप से 5 अगस्त को शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के साथ शुरू हुआ और यह बांग्लादेश में एक भयावह रूप से प्रभावी भूमिका निभा रही है। बांग्लादेश में इससे पहले कभी भी भीड़ की ऐसी गतिविधि नहीं देखी गई थी।
बता दें सोमवार को भी गुलशन इलाके में स्थित इसी परिसर में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कुछ आरोपों के आधार पर इसी तरह की तलाशी ली गई थी।
बांग्लादेश पिछले कई महीनों से देशव्यापी हिंसा और दंगों से जूझ रहा है और लगभग रोजाना निकाले जा रहे विरोध मार्च अब देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों में बढ़ती बेचैनी को उजागर करते हैं।

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