बजाज जनरल इंश्योरेंस में 25 करोड़ की मोटर इंश्योरेंस धोखाधड़ी, FIR दर्ज

देहरादून। भारत की अग्रणी प्राइवेट जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में से एक, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड) ने थर्ड पार्टी क्षतिपूर्ति क्लेम के आधार पर 25 करोड़ रुपये के मोटर एक्सीडेंट इंश्योरेंस धोखाधड़ी को सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इस धोखाधड़ी को गलत एफआईआर और भ्रामक दस्तावेज़ों के माध्यम से मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमटीटी), भुज को सबमिट किया गया था।
यह केस भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत साणंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुआ था। यह शिकायत कथित चालक द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसने दावा किया कि वह महिंद्रा ज़ायलो चला रहा था और अचानक एक कुत्ता सड़क पर सामने आ गया, जिसके कारण वाहन पलट गया। उसने आरोप लगाया कि उसके बगल में बैठे सह-चालक को गंभीर चोटें आईं और उसे साणंद सरकारी हॉस्पिटल में मृत घोषित कर दिया गया।
इसके बाद मृतक के कानूनी वारिसों ने भुज में एमटीसी के समक्ष 25 करोड़ रुपये का मुआवज़ा क्लेम दायर किया। बजाज जनरल इंश्योरेंस को कोर्ट के समन प्राप्त हुए और आंतरिक जांच शुरू की गई । कंपनी ने एफआईआर, चार्जशीट, पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल और पंचनामा रिपोर्ट्स और वाहन के डॉक्यूमेंट प्राप्त किए । कंपनी को एफआईआर और सहायक डॉक्यूमेंट संदिग्ध लगे और उनसे यह संकेत मिला कि ये धोखाधड़ी करने की तैयारी के साथ किया गया प्रयास था। न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को समझते हुए, बजाज जनरल इंश्योरेंस ने गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना को प्राथमिक रूप से संदिग्ध माना जा रहा है और फिर मामले की दोबारा जांच के लिए सीआईडी क्राइम ब्रांच के तहत एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) नियुक्त की गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम याचिका में सभी कार्यवाहियों को एसआईटी की रिपोर्ट प्राप्त होने तक स्थगित कर दिया गया।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सीआईडी क्राइम और रेलवे, गुजरात राज्य के नेतृत्व में, एसआईटी ने अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया। जांच में पुष्टि हुई कि असल में वह सह-चालक दुर्घटना के समय अकेले गाड़ी चला रहा था। कथित चालक ने जानबूझकर झूठी एफआईआर दर्ज की, गवाहों को गुमराह किया और धोखाधड़ी भरे दावे का समर्थन करने के लिए जाली सबूत प्रस्तुत किए। वाहन के मालिक ने भी इंश्योरेंस ले रखा था और उन्होंने भी प्रधान सिविल न्यायाधीश, मेहसाणा के समक्ष रेग्युलर डैमेज मिसलेनियस के माध्यम से अपने वाहन के नुकसान का क्लेम करने का प्रयास किया, हालांकि यह क्लेम पहले ही अस्वीकार किया जा चुका था। सत्यापित सबूतों के आधार पर, बजाज जनरल इंश्योरेंस ने कथित चालक और इंश्योर्ड व्यक्ति दोनों के खिलाफ साणंद पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की, जिसमें साजिश, सबूतों का निर्माण और धोखाधड़ी का प्रयास का आरोप शामिल था।
बजाज जनरल इंश्योरेंस इंश्योरेंस ने धोखाधड़ी पर अपनी ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी को लगातार बनाए रखा है। कंपनी धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों की पहचान करने, उनकी जांच करने और उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी पॉलिसीधारकों से अनुरोध है कि सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की तुरंत रिपोर्ट करें। इंश्योरेंस धोखाधड़ी न केवल बिज़नेस को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ईमानदार कस्टमर और पूरी कम्युनिटी को भी नुकसान पहुंचाती है। इस केस में बताया गया है कि किसी भी पृष्ठभूमि का व्यक्ति धोखाधड़ी में शामिल हो सकता है. बजाज जनरल इंश्योरेंस न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायालयों के साथ काम करना जारी रखेगा।

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