कृष्ण जन्म के उपरांत बाल गोपाल की छठी:  तिथि, व्रत-विधि, भोग और महत्व

श्रीकृष्ण जन्म के बाद बाल गोपाल की छठी परंपरा हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है। इसे लड्डू गोपाल की छठी भी कहा जाता है और सामान्य रूप से जन्माष्टमी के छठे दिन मनाया जाता है। इस वर्ष कान्हा जी की छठी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के छह दिन बाद, यानी जन्म के छठे दिन होती है। इस साल यह पर्व 21 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।

तिथि और योग

– कृष्ण जन्म के समय भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी है। उनके जन्म के छह दिन बाद आने वाली तिथि पर छठी मनाई जाती है, जिसे बाल गोपाल की छठी कहा जाता है।

– इस वर्ष कृष्ण छठी पर शुभ योग बन रहा है, जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग का सिंहावलोकन है। ऐसा योग शुभ प्रभाव देता है, ऐसी मान्यता है। इस योग में किया गया संकल्प और पूजा अधिक फलदाई मानी जाती है।

महत्व

– बाल गोपाल की छठी भगवान के बाल रूप की पूजा का एक विशेष अवसर है, जिसमें बच्चे-पालन, माँ-बहनों और घर-परिवार के लिए आनंद का प्रतीक माना जाता है।

– इसे छोटे बच्चों के जन्म के बाद पहली पसंद के कार्यक्रम के समान माना जाता है; भक्त बाल गोपाल के जन्मोत्सव से जुड़े रस, मिठास और भोग में अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

– यह दिन भक्ति, सुगंधित रोशनाई, गीत-संगीत और आरती से भरा रहता है, जो घर-परिवार में खुशहाली और समृद्धि का संदेश देता है।

भोग और प्रसाद

– इस दिन छठी के भोग में कढ़ी-चावल का विशेष स्थान है, क्योंकि यह लड्डू गोपाल को पंसद होता है और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

– अन्य सामान्य प्रसादों में माखन, मिश्री और मालपुआ भी प्रमुख रूप से अर्पित किए जाते हैं।

– कुछ स्थानों पर गुझिया, चूरमा और ठंडी मिठाइयां भी भोग के रूप में रखी जाती हैं।

पूजन विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
1) प्रामाणिक आरंभ: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और कंठ पर साफ वस्त्र पहनें। घर के पूजन थाल को स्वच्छ बनाएं।
2) प्रतिमा स्थापना: पवित्र लाल या पीला कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें। अगर लड्डू गोपाल की छोटी मूर्ति हो, तो उसे कोमल फूलों से सजाएं।
3) अभिषेक और श्रृंगार: पंचामृत (दूध, दही, घी, शैंघा, शक्कर) से स्नान कराएं। फिर चंदन-तिलक, रोली-साđ्थ, हल्दी और पुष्प-मालाओं से सजाएं। बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं।
4) दीप-आरती: घर के मुख्य चौकी पर घी का दीपक जलाकर आरती करें। बजायें गीत, हल्की आरती और भजन के साथ कीर्तन करें।
5) भोग-प्रसाद: बाल गोपाल को कढ़ी-चावल का भोग लगाएं। साथ में मखना, मिश्री, मालपुआ आदि भी अर्पित करें। कुछ घरों में लड्‌डू और फ्रूट्स भी रखे जाते हैं।
6) आशीर्वचन और संकल्प: भक्त-परिवार एक-एक बार भगवान से आशीर्वाद की कामना करें और आगामी दिनों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त करें।
7) समापन: आरती के बाद प्रसाद का वितरण करें। घर में सुख-शांति और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

यज्ञ व प्रेरणा

– इस दिन बाल गोपाल के साथ बिताया गया समय बच्चों के मन में भक्ति, संस्कार और सेवा-भाव बढ़ाता है।

– परिवार में एकता और प्रेम के भाव को मजबूत बनाता है। छठी के अवसर पर परिवारिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और बच्चों के साथ कथा-श्रवण भी प्रचलन में रहता है।

अस्वीकरण
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गांरंटी नहीं है।हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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