छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, छात्र संघ ने दी तालाबंदी की चेतावनी
देहरादून, 17 अप्रैल 2025। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री प्रकरण, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आ गया, जब शासन ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओंकार यादव, परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल और वित्त नियंत्रक विक्रम सिंह जंतवाल से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
इस कार्रवाई को छात्र संघ ने अपनी आंशिक जीत के रूप में लिया है। डीएवी छात्र संघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने शासन की सख्ती का स्वागत करते हुए कहा, “दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यदि हमारी मांगे नहीं मानी गईं, तो अगले सप्ताह से विश्वविद्यालय में पूर्ण तालाबंदी की जाएगी।”
ज्ञात हो कि विश्वविद्यालय में ईआरपी सॉफ्टवेयर घोटाले को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि कुलपति डॉ. यादव ने अपने करीबी रिश्तेदार की विवादित ईआरपी कंपनी को करोड़ों का अनुबंध दिलवाया, जबकि शासन ने उक्त कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन के आदेश की अवहेलना कर कंपनी को फिर से लागू करने के प्रयास किए।
छात्र संघ का आरोप है कि सॉफ्टवेयर की खामियों और व्यवस्थागत भ्रष्टाचार के कारण परीक्षा परिणामों की घोषणा में तीन महीने से अधिक की देरी हो चुकी है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
सिद्धार्थ अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि शासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को तत्काल बर्खास्त नहीं किया गया और सभी परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित नहीं किए गए, तो आंदोलन उग्र रूप ले लेगा।
फिलहाल विश्वविद्यालय में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और शासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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