

LUCC सोसाइटी ने पोंजी स्कीम चलाकर जमाकर्ताओं को लगाया 400 करोड़ का चूना
देहरादून। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI ने उत्तराखंड के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में से एक LUCC मामले में आज देहरादून स्थित BUDS अधिनियम के विशेष न्यायालय में 18 आरोपियों और संस्था के खिलाफ आरोप-पत्र दायर कर दिया है।
यह मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी LUCC से जुड़ा है। CBI ने यह चार्जशीट समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट और LUCC सोसाइटी के खिलाफ दायर की है। इन पर भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, उत्तराखंड जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम और अनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।
CBI ने बताया कि माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल ने वर्ष 2025 में LUCC घोटाले से जुड़ी सभी प्राथमिकियों को CBI को स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद 26.11.2025 को CBI ने मामला दर्ज कर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में दर्ज 18 FIR का अन्वेषण अपने हाथ में लिया था।
जांच में सामने आया कि LUCC को 2012 में वाजिद खान ने मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में पंजीकृत कराया था। 2016 में मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल ने प्रबंधन संभाला और नया निदेशक मंडल बनाया। इसके बाद उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के जरिए अवैध जमा योजनाएं चलाई गईं। हालांकि सोसाइटी को उत्तराखंड में काम करने की NOC 2017 में मिली थी, लेकिन समीर अग्रवाल ने 2016 से ही अवैध रूप से संचालन शुरू कर दिया था।
CBI के अनुसार LUCC का कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। जमाकर्ताओं को परिपक्वता भुगतान नए निवेशकों के पैसे से किया जा रहा था। इस तरह यह पूरी तरह पोंजी स्कीम थी। उत्तराखंड में लगभग 1 लाख से अधिक निवेशकों को विभिन्न योजनाओं में निवेश के लिए लालच दिया गया। कुल निवेश लगभग 800 करोड़ रुपये का है। कुछ लोगों को आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन धोखाधड़ी की राशि 400 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
जांच में पता चला कि मुंबई निवासी समीर अग्रवाल इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड है। उसने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में 10 शेल फर्मों के बैंक खाते खुलवाए। जमाकर्ताओं का पैसा इन खातों में ट्रांसफर कर लेयरिंग के जरिए सैकड़ों खातों में भेजा गया। CBI ने बताया कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हो गए हैं। उनके खिलाफ नोटिस और सर्कुलर जारी किए गए हैं।
इस मामले में LUCC के पदाधिकारी शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, दिनेश सिंह और कैश मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, ममता भंडारी को भी आरोपी बनाया गया है। ये लोग शाखाओं से एकत्र नकदी को बैंकिंग सिस्टम से बचाकर विभिन्न स्थानों पर भेजते थे।
CBI ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई थी। जांच के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों की 39 संपत्तियों की पहचान की गई। इनमें से 29 संपत्तियों को BUDS अधिनियम 2019 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनंतिम रूप से कुर्क किया जा चुका है। बाकी 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया चल रही है।
अब तक इस मामले में तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे जांच जारी है।

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