

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस आलाकमान पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि राष्ट्रभावना विरोधी सोच में ही “दिमागी नक्सल” पनप सकता है।
शनिवार को मीडिया से बातचीत में भट्ट ने कहा कि देश आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम का संपूर्ण गायन कर गौरवान्वित महसूस कर रहा है। लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को जनता की यह खुशी हजम नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रगीत का इस तरह अपमान नहीं किया जाता।
भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के कारण हमेशा वंदे मातरम को उचित सम्मान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले संसद में वंदे मातरम का पूर्ण गायन सुनिश्चित कराया और अब मानसून सत्र में उसके सम्मानजनक गायन के लिए नियम बनाए हैं। इसी वजह से सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्रगीत के अपमान पर उतर आया है। उन्होंने कहा कि इस घटना से कांग्रेस की राष्ट्र विरोधी और तुष्टिकरण की नीति एक बार फिर सामने आई है।
“जमीन से खत्म नक्सल, विपक्ष के दिमाग में जड़ जमा रहा”
प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से “दिमागी नक्सल” पर जताई गई चिंता पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया को भी भट्ट ने राष्ट्र विरोधी सोच की उपज बताया।
उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार में रहते हुए नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते थे, उनके शासनकाल में 180 जिलों में नक्सल का आतंक था। इस दौरान लगभग 5000 नागरिक और 1000 से अधिक अर्धसैनिक बल के जवान शहीद हुए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश को नक्सलमुक्त करने पर उनका नाराज होना स्वाभाविक है।
भट्ट ने तंज कसते हुए कहा कि लगता है धरातल से मिटाया गया नक्सलवाद अब विपक्षी नेताओं के दिमागों में जड़ जमाने लगा है। शायद इसी कारण पीएम की चुनौती के अगले ही दिन “दिमागी नक्सलवादी” सामने आने लगे। उन्होंने पूर्व गृहमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में एक साथ 76 जवानों की नृशंस हत्या हुई थी और अब उनका नक्सली सोच के समर्थन में सामने आना अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है।

Recent Comments