

BKTC में नियुक्तियों और चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विनोद चमोली और गणेश गोदियाल ने एक-दूसरे पर तीखे बयान दिए।
देहरादून: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में नियुक्तियों और हाल ही में सामने आए चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। भाजपा ने पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं, जबकि गोदियाल ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में निलंबित किए गए वैयक्तिक सहायक (पीए) को वर्ष 2014 में स्थायी नियुक्ति उस समय मिली थी, जब गणेश गोदियाल बीकेटीसी के अध्यक्ष थे। उनका कहना था कि इस कारण इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी भी गोदियाल पर बनती है और उन्हें प्रदेश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
चमोली ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच आगे बढ़ने पर उस समय की नियुक्ति प्रक्रिया और तत्कालीन कार्यकाल की भी समीक्षा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता और पवित्रता को लेकर गंभीर है, इसलिए मामले में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और पारदर्शी नीति के अनुरूप हुई थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से संविदा अथवा अल्प मानदेय पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक समान नीति बनाई गई थी और उसी के आधार पर नियुक्तियों को नियमित किया गया। इसमें किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया।
विनोद चमोली की ओर से माफी मांगने की मांग पर पलटवार करते हुए गोदियाल ने भाजपा के तर्क को निराधार और हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी व्यक्ति पर किसी अन्य मामले या घोटाले में आरोप सिद्ध हो जाएं, तो क्या उसके लिए उन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा, जिन्होंने वर्षों पहले नियमानुसार उसकी नियुक्ति की थी? उन्होंने इसे केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास बताया।
बीकेटीसी में नियुक्तियों और चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी ने प्रदेश की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर भाजपा पूर्व कार्यकाल की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के तहत हुई थीं और मौजूदा विवाद को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

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