जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा का जलवा

भाजपा 10 जिलों पर काबिज — कांग्रेस को एक सीट पर सिमटना पड़ा

देहरादून। उत्तराखंड में 14 अगस्त को संपन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नतीजे भाजपा के पक्ष में गए। राज्य के 12 जिलों में से 10 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए, जबकि कांग्रेस के खाते में केवल देहरादून की एक सीट आई। एक जिले में चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है।

कांग्रेस को मिली देहरादून सीट
देहरादून जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कौर ने 17 मत पाकर जीत हासिल की। उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के अभिषेक सिंह ने 18 वोटों से जीत दर्ज की। अभिषेक सिंह, चकराता से विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के पुत्र हैं।

नैनीताल में चुनाव टला, हाईकोर्ट के आदेश पर अब 18 अगस्त को मतदान
नैनीताल जिले में चुनावी माहौल उस समय बिगड़ गया जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने उनके कुछ जिला पंचायत सदस्यों को जबरन रोक लिया। कांग्रेस का दावा था कि उनके पास बहुमत के लिए 15 से अधिक सदस्यों का समर्थन था, लेकिन कुछ सदस्य मतदान से पहले ‘लापता’ हो गए। मामला अदालत पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को दोबारा मतदान कराने के निर्देश दिए।

विजेता जिला पंचायत अध्यक्ष

भाजपा की जीत का आंकड़ा
भाजपा के प्रत्याशियों ने चमोली, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में गुरुवार को जीत दर्ज की। वहीं, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, चंपावत, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में भाजपा उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। इस तरह कुल 10 जिला पंचायत अध्यक्ष पद भाजपा के खाते में आए।

चुनावी प्रक्रिया और पृष्ठभूमि
राज्य में जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, ज्येष्ठ और कनिष्ठ प्रमुख पदों के लिए मतदान हुआ। 5 जिलों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। हरिद्वार जिले में इस पद पर पहले ही निर्विरोध चयन हो चुका था, जबकि नैनीताल में मतदान स्थगित कर दिया गया।

भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जीत के बाद जमकर जश्न मनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर विजेता प्रत्याशियों को बधाई दी। दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला था, लेकिन भाजपा ने आरक्षण और अन्य राजनीतिक चालों का इस्तेमाल करके कई पदों पर कब्जा किया।

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