पहली पत्नी के दबाव से तंग आकर पति ने की थी हत्या, 2500 CCTV खंगालने और 5000 लोगों के सत्यापन के बाद सलाखों के पीछे पहुंचा हत्यारा
देहरादून। राजधानी के प्रेमनगर क्षेत्र में बीते दिनों मिले एक अज्ञात महिला के क्षत-विक्षत शव ने दून पुलिस की नींद उड़ा दी थी। एसएसपी देहरादून के कुशल मार्गदर्शन में प्रेमनगर पुलिस ने इस ‘ब्लाइंड मर्डर’ की गुत्थी को सुलझाते हुए न केवल मृतका की पहचान की, बल्कि उसे इंसाफ दिलाते हुए कातिल पति को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जिसमें प्यार, बेवफाई और फिर एक खौफनाक अंत शामिल है।
घटना का आगाज 11 मार्च 2026 को हुआ, जब प्रेमनगर के मांडूवाला रोड स्थित बालासुंदरी मंदिर परिसर के पास स्थानीय लोगों ने एक सफेद प्लास्टिक का कट्टा देखा। पास जाने पर उसमें से आ रही दुर्गंध ने अनहोनी का संकेत दिया। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष प्रेमनगर कुन्दन राम पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुँचे। कट्टे के अंदर एक महिला का शव रजाई से लिपटा हुआ मिला। शव करीब 4 से 5 दिन पुराना होने के कारण चेहरा पूरी तरह खराब हो चुका था, जिससे शिनाख्त करना नामुमकिन सा लग रहा था।
एसएसपी देहरादून ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 08 अलग-अलग टीमें गठित कीं। चुनौती बड़ी थी क्योंकि घटनास्थल के पास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था और चारों तरफ घना जंगल था।
- डिजिटल जाल: पुलिस ने आसपास के मार्गों पर लगे 2500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
- ग्राउंड जीरो: महिला के कपड़ों से उसके मजदूर वर्ग से होने का अंदेशा था, लिहाजा पुलिस ने 30 से अधिक मलिन बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों में दस्तक दी।
- सत्यापन: लगभग 5000 बाहरी और स्थानीय व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन किया गया। पुलिस खुद वादी बनी और मृतका को न्याय दिलाने की मुहिम शुरू की।
19 मार्च को पुलिस टीम जब ‘कासवाली कोठरी’ पहुंची, तो एक अहम सुराग मिला। पता चला कि वहां काम करने वाला बिहार का मजदूर रंजीत शर्मा पहले अपनी एक पत्नी और बच्ची के साथ रह रहा था, लेकिन अब उसके साथ कोई दूसरी महिला दिख रही है। शक गहराने पर पुलिस ने ठेकेदार शिवजी से पूछताछ की। ठेकेदार ने बताया कि रंजीत की दो पत्नियां हैं। पहली पत्नी रूपा फरवरी में आई थी, लेकिन 9 मार्च को रंजीत ने कहा कि वह बिहार चली गई है और अब उसकी दूसरी पत्नी सुशीला उसके साथ रहने आ गई है।
पुलिस ने जब भाटोवाला में दबिश देकर रंजीत को पकड़ा, तो उसने भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया। सख्ती से हुई पूछताछ में उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।

अभियुक्त रंजीत ने बताया कि उसकी शादी 2009 में रूपा (मृतका) से हुई थी। 4 साल पहले रूपा उसे छोड़कर किसी और के साथ चली गई, जिसके बाद रंजीत ने सुशीला से शादी कर ली। लेकिन एक साल पहले रूपा फिर से रंजीत के संपर्क में आई और फरवरी 2026 में अपनी 11 माह की बच्ची को लेकर देहरादून पहुंच गई।
रूपा लगातार रंजीत पर दबाव बना रही थी कि वह अपनी दूसरी पत्नी सुशीला को छोड़ दे। 5 मार्च की रात मोबाइल छीनने और दूसरी पत्नी से बात करने को लेकर हुए विवाद के बाद रंजीत ने रूपा का गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
रंजीत ने हत्या के बाद शव को एक सफेद कट्टे में बंद कर रजाई से ढंक दिया और एक सुनसान कमरे में छिपा दिया। वह मौके की तलाश में था, लेकिन 11 माह की मासूम बच्ची की जिम्मेदारी और दिन में लोगों की आवाजाही के कारण वह लाश नहीं फेंक सका। 8 मार्च को जब उसकी दूसरी पत्नी सुशीला देहरादून पहुंची, तो उसने बच्ची को सुशीला के पास छोड़ा और ठेकेदार की मोटरसाइकिल मांगकर लाश को पीछे बांधा और मांडूवाला के जंगलों में फेंक आया।
इस कठिन केस को रिकॉर्ड समय में सुलझाने के लिए आईजी गढ़वाल ने 5000 रुपये और एसएसपी देहरादून ने 2500 रुपये के इनाम की घोषणा की है। थानाध्यक्ष प्रेमनगर कुन्दन राम के नेतृत्व वाली टीम में उपनिरीक्षक अमित शर्मा, सतेन्द्र सिंह और एसओजी के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

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