980 करोड़ के लोन में फर्जी नेटवर्थ का आरोप, सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI की FIR

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मीडिया जगत की जानी-मानी हस्ती और एसेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से करीब 980 करोड़ रुपये का लोन हासिल करने के लिए अपनी नेटवर्थ को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया। लोन के डिफॉल्ट होने के चलते LICHFL को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का आरोप है।

सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक मामला वर्ष 2018 में स्वीकृत दो अलग-अलग लोन सुविधाओं से जुड़ा है। इन दोनों लोन की मंजूरी और वितरण के लिए सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की ओर से जारी नेटवर्थ सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किए गए थे। इनमें एक लोन 500 करोड़ रुपये का वसंत सागर प्रॉपर्टीज लिमिटेड को दिया गया था, जिसमें पैन इंडिया इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स सह-उधारकर्ता थी। इस लोन के लिए चंद्रा ने 28 मार्च 2018 को गारंटी दी थी। वहीं, दूसरा 480 करोड़ रुपये का लोन डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट को रेंटल सिक्योरिटाइजेशन स्कीम के तहत दिया गया था, जिसमें स्पिरिट इन्फ्रा पावर सह-उधारकर्ता थी।

जांच के दौरान सीबीआई ने नेटवर्थ से जुड़े आंकड़ों में कथित तौर पर बड़ा अंतर पाया। एफआईआर के अनुसार मार्च 2018 में डीआईएम एंड कंपनी की ओर से जारी प्रमाणपत्र में सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि जुलाई 2018 में एमपीजे एंड कंपनी के प्रमाणपत्र में उनकी नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये दर्शाई गई। बाद में जब संबंधित कंपनियां लोन चुकाने में असफल रहीं और मामला दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत अदालत पहुंचा, तो चंद्रा ने इन पुराने नेटवर्थ प्रमाणपत्रों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वर्ष 2017-18 में उनकी नेटवर्थ 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी और वर्ष 2024 में यह घटकर 31.79 करोड़ रुपये रह गई थी।

सीबीआई का आरोप है कि सुभाष चंद्रा ने संबंधित कंपनियों के निदेशकों और अधिकारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर एक साजिश के तहत गलत दस्तावेज तैयार किए और सरकारी वित्तीय संस्था से लोन हासिल किया। जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में LICHFL के भरोसे का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया और लोन की रकम को दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया। मामले में फिलहाल नामजद आरोपियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है।

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