देश में जितने भी गृह युद्ध हो रहे हैं, उसके जिम्मेदार सिर्फ सीजेआई संजीव खन्ना हैं, निशिकांत दुबे का विवादित बयान

नई दिल्ली ,20 अपै्रल(आरएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (क्चछ्वक्क) के सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को न्यायपालिका और भारत के मुख्य न्यायाधीश (ष्टछ्वढ्ढ) को लेकर बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने देश में चल रहे कथित ‘गृह युद्धों’ के लिए सीधे तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि अदालत अपनी संवैधानिक सीमा से बाहर जाकर काम कर रही है और देश में धार्मिक टकराव भडक़ाने के लिए भी वही जिम्मेदार है।
निशिकांत दुबे ने पत्रकारों से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा, इस देश में जितने भी गृह युद्ध हो रहे हैं, उसके जिम्मेदार केवल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों, विशेष रूप से राष्ट्रपति और राज्यपालों से जुड़े निर्णयों पर नाराजगी व्यक्त की। दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों का भी जिक्र करते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने समलैंगिकता को अपराध मानने वाली ढ्ढक्कष्ट की धारा 377 को रद्द करने और ऑनलाइन सामग्री से जुड़ी आईटी एक्ट की धारा 66ए को समाप्त करने जैसे निर्णयों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहां सभी धर्म समलैंगिकता को अपराध मानते हैं और आईटी एक्ट महिलाओं-बच्चों को पॉर्नोग्राफी से बचाने के लिए था, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इन धाराओं को खत्म कर दिया।
बीजेपी सांसद ने ज्ञानवापी, मथुरा और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राम मंदिर का विषय था या अब ज्ञानवापी और मथुरा का विषय है, तो अदालतें संबंधित पक्षों से कागज दिखाने को कहती हैं, लेकिन मुगल काल के बाद बनी मस्जिदों के मामले में यह नहीं पूछा जाता कि उनके पास कागज कहां से आएंगे। उन्होंने इसे देश में धार्मिक युद्ध भडक़ाने वाला बताया, जिसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को जिम्मेदार ठहराया।
निशिकांत दुबे ने संविधान के आर्टिकल 141 और 368 का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिकल 141 कहता है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाया गया कानून सभी अदालतों पर लागू होता है, जबकि आर्टिकल 368 संसद को संविधान के तहत सभी कानून बनाने का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट अब राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक प्रमुखों को भी ‘तीन महीने में क्या काम करना है’ जैसे निर्देश दे रहा है, जो उसकी सीमा से बाहर अनावश्यक हस्तक्षेप है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर सुप्रीम कोर्ट ही सारे कानून बनाएगा, तो संसद का कोई मतलब नहीं रह जाता और इसे बंद कर देना चाहिए।
दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के उद्देश्य पर भी सवाल उठाते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट का एकमात्र उद्देश्य  (चेहरा दिखाओ, हम आपको कानून दिखाएंगे) है।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments