सीएम धामी ने स्वर्गीय दिवाकर भट्ट, राजेश जुवांठा और बलवीर नेगी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

गैरसैण । उत्तराखंड विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार का दिन बेहद भावुक रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की राजनीति के तीन प्रमुख स्तंभों—पूर्व विधायक व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय दिवाकर भट्ट, पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेश जुवांठा और पूर्व विधायक स्वर्गीय बलवीर सिंह नेगी को सदन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने इन तीनों नेताओं के निधन को राज्य के सामाजिक और राजनीतिक जीवन के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति बताया, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।

‘फील्ड मार्शल’ दिवाकर भट्ट: जनआंदोलन का निर्भीक चेहरा
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के पुरोधा और देवप्रयाग के पूर्व विधायक स्वर्गीय दिवाकर भट्ट के संघर्षमय जीवन का स्मरण करते हुए उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ के संबोधन से नवाजा। सीएम ने कहा कि 1946 में टिहरी के सुपार गांव में जन्मे भट्ट जी ने महज 19 वर्ष की आयु से ही जनहित की लड़ाई लड़नी शुरू कर दी थी। उन्होंने बीएचईएल जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को उत्तराखंड राज्य की मांग के लिए कुर्बान कर दिया। मुख्यमंत्री ने 1995 के श्रीयंत्र टापू आंदोलन, खैट पर्वत के अनशन और उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक नारे ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ का विशेष उल्लेख किया, जिसने राज्य आंदोलन को नई दिशा दी थी। 2007 में विधायक और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने राजस्व, खाद्य आपूर्ति और सैनिक कल्याण जैसे विभागों में अपनी स्पष्टवादिता और सादगी की अमिट छाप छोड़ी। 25 नवंबर 2025 को उनका निधन उत्तराखंड के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है।

राजेश जुवांठा: युवा जोश और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता
पुरोला के पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेश जुवांठा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें एक ऊर्जावान और संवेदनशील जनप्रतिनिधि बताया। 1977 में जन्मे राजेश जुवांठा को जनसेवा की विरासत अपने पिता स्वर्गीय बर्फिया लाल जुवांठा और माता शांति जुवांठा से मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र पंचायत सदस्य से विधायक तक का उनका सफर पूरी तरह जमीनी सक्रियता पर आधारित था। सदन में अनुसूचित जाति, जनजाति और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाने वाले जुवांठा अपने सरल और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। मात्र 48 वर्ष की आयु में 22 दिसंबर 2025 को हृदयगति रुकने से उनका असमय जाना पूरे प्रदेश के लिए मर्माहत करने वाला है।

बलवीर सिंह नेगी: सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक
टिहरी और घनसाली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता स्वर्गीय बलवीर सिंह नेगी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उनका पूरा जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित रहा। थाती गांव में जन्मे नेगी ने दो बार ब्लॉक प्रमुख और तीन बार विधायक के रूप में अपनी संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया। जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होकर सदन पहुंचे नेगी ने गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। 26 जनवरी 2026 को 78 वर्ष की आयु में उनका निधन सक्रिय राजनीति के एक ऐसे दौर का समापन है, जिसमें सादगी और विकास को सर्वोपरि रखा गया।
मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से तीनों दिवंगत नेताओं की आत्मा की शांति की प्रार्थना की और उनके शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। इस दौरान सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी नम आंखों से इन विभूतियों को याद किया।

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