कांग्रेस ने जताई आपत्ति : परेड ग्राउंड की अनुमति देने पर उठाए सवाल

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के लिए परेड ग्राउंड मना किया तो एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए कैसे दिया परेड ग्राउंड

उत्तराखंड का कोई महापुरुष नहीं मिला अधिवेशन स्थल के नामकरण के लिए जो बन रहा “भगवान विरसा मुंडा नगर”

देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने इस बात पर गहरी आपत्ति दर्ज करी है कि जब पिछले वर्ष अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे की जन सभा के लिए प्रदेश शासन व जिला प्रशाशन ने परेड ग्राउंड की अनुमति यह कहते हुए खारिज कर दी थी तो अब उसी परेड ग्राउंड की अनुमति अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को उनके तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए कैसे दे दी गई।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह सवाल देहरादून जिला प्रसाशन व प्रदेश सरकार दोनों से किया। श्री धस्माना ने कहा कि जिला प्रसाशन व प्रदेश सरकार को इस सवाल का जवाब देना पड़ेगा कि एक राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष और वह भी नेता विपक्ष की सभा के लिए जिस स्थान को आवंटित नहीं किया गया यह कहते हुए कि राजनैतिक कार्य व सभा के लिए आवंटन नहीं हो सकता अब उसी स्थान को तीन दिन के अधिवेशन के लिए कैसे आवंटित किया गया।

श्री धस्माना ने कहा कि इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भाजपा के छात्र विंग के अधिवेशन स्थल का नाम “भगवान विरसा मुंडा नगर” रखा गया है । उन्होंने कहा कि श्री विरसा मुंडा झारखंड के महापुरुष हैं और उनका हम भी सम्मान करते हैं किन्तु उत्तराखंड में आयोजित हो रहे कार्यक्रम स्थल का नाम उत्तराखंड के किसी महापुरुष के नाम पर किए जाने की बजाय झारखंड के किसी महापुरुष किया जाना समझ से परे है। श्री धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड में अनेक विभूतियां राजनैतिक, साहित्यिक, सामाजिक क्षेत्र की हैं , अनेक राष्ट्रीय हीरो हैं जिन्होंने क्षेत्र का नाम देश में और दुनिया में रौशन किया है।

उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, श्रीदेव सुमन, तीलू रोतेली, बैरिस्टर मुकुंदी लाल, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और अनेक देश के शहीद जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण नौछावर कर दिए किसी के नाम पर भी अधिवेशन स्थल का नाम रखा जा सकता था। धस्माना ने कहा कि पूरे देश से जो डेलीगेट आयेंगे वे भ्रम में रहेंगे कि भगवाल विरसा मुंडा उत्तराखंड के हैं या झारखंड के।

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