सत्राविधि को लेकर कांग्रेसी आरोप, राजनीतिक पाखंड : भाजपा

विपक्ष राजनीति नही, सत्र की तैयारी करे! सीएम जरूरतानुशार समयवृद्धि को तैयार हैं : चमोली

सकारात्मक विपक्षी रुख से ही जनता ने भाजपा को सरकार की भूमिका दी है: चमोली

जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका से ही, सदन अधिक भी चला और जनता ने हमें सरकार भी बनाया: भाजपा

देहरादून । भाजपा ने सत्र की अवधि को लेकर कांग्रेसी आरोपों को झूठ, भ्रम आधारित राजनीतिक पाखंड बताया है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री विनोद चमोली ने कहा, कांग्रेस सरकारों में भाजपा, जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाता था तो सदन भी सकारात्मक रूप से चलता था। लेकिन अब विपक्ष, 9 साल से हंगामे, बायकॉट के नकारात्मक एजेंडे पर काम कर रहा है, लिहाजा उनके लिए समय की कोई अहमियत नहीं है। उसपर स्वयं मुख्यमंत्री भी कह चुके हैं कि जरूरत हुई तो अवधि बढ़ाई जा सकती है।

मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए श्री चमोली ने कहा सत्र की अवधि सदन के कामकाज की दृष्टि से कार्य मंत्रणा समिति द्वारा निर्धारित की जाती है। जिसमें विपक्ष के विधायक भी शामिल होते हैं और जो भी बिजनेस सत्र को लेकर उचित समझा जाता है उसके अनुसार ही निर्णय लिया जाता है। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं विधायकों द्वारा बार-बार सत्र की समय अवधि को लेकर झूठ और भ्रम फैलाना उनकी नकारात्मक राजनीति का हिस्सा है। क्योंकि प्रदेश की जनता भी गवाह है कि विगत 9 वर्षों में कभी भी कांग्रेस पार्टी या अन्य दलों द्वारा जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई गई। उनका पूरा ध्यान सदन में हंगामा करने और मीडिया की सुर्खियां बनने में लगा रहा। पिछले गैरसैण सत्र में तो विपक्ष के विधायक जनता के मुद्दे उठाने के बजाय सदन में सोते हुए नजर आए।

उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अधिक दिनों तक सदन चलने के सवाल पर आईना दिखाया कि उस समय भाजपा ने जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका का निर्वहन किया था। जिसके चलते ही हम सदन में जनमुद्दों को उठाने और तत्कालीन सरकार के कारनामों को उजागर करने में सर्वाधिक सफल हुए। तब भाजपा के सकारात्मक रुख के कारण ही सत्र की अवधि अधिक हुई। जिसका ही नतीजा रहा कि प्रदेश की जनता ने हमें 2017 में सकारात्मक विपक्ष से सरकार की भूमिका में स्थापित किया। अब चूंकि विपक्ष तब से लेकर लगातार हंगामा करने, सदन बाधित करने और सदन के बायकाट करने की रणनीति पर ही काम कर रहा है। तो जनता भी लगातार उनको चुनाव में हराकर, सदन से बाहर ही रखने का निर्णय ले रही है। लिहाजा विपक्ष को सदन में जनता के मुद्दों को उठाने, सकारात्मक चर्चा में सहयोग करने और अपनी नकारात्मक रणनीति पर विचार करना चाहिए। क्योंकि प्रदेश की जनता उनके ऐसे राजनीतिक पाखंड को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने वाली है।

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